मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत होने का दावा किया गया है। ईरान के सरकारी मीडिया ने भी उनकी मौत की पुष्टि करने की बात कही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए हैं, जिनमें उनकी बेटी, पोता, दामाद और बहू शामिल हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर खामेनेई की मौत का दावा किया। उन्होंने लिखा कि खामेनेई आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं सके और इजरायल के साथ मिलकर की गई कार्रवाई में मारे गए। ट्रंप ने इसे ईरानी जनता के लिए “देश वापस लेने का मौका” बताया और कहा कि ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के कई अधिकारी अब लड़ना नहीं चाहते।
वहीं इजरायली सेना Israel Defense Forces ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर कहा कि इजरायली वायुसेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। इन हमलों में सात वरिष्ठ ईरानी अधिकारी मारे जाने की जानकारी दी गई है, जिनमें अली शामखानी और मोहम्मद पाकपुर सहित अन्य शीर्ष सैन्य नेता शामिल हैं।
कौन थे अयातुल्लाह अली खामेनेई?
1939 में मशहद में जन्मे खामेनेई ने क़ोम में धार्मिक शिक्षा प्राप्त की और 1960 के दशक में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व वाले आंदोलन से जुड़ गए। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वे सत्ता के केंद्र में आए और 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे। इसके बाद वे खुमैनी के उत्तराधिकारी के रूप में सर्वोच्च नेता बने।
सर्वोच्च नेता के रूप में उन्होंने ईरान की नीतियों और सशस्त्र बलों का नेतृत्व किया। वे अमेरिका और इजरायल के मुखर आलोचक रहे और इस्लामिक गणराज्य की वैचारिक दिशा तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। उनकी मृत्यु के दावे के बाद क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
