बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए मंदिरों में अर्पित पुष्प अपशिष्ट से प्राकृतिक और त्वचा-अनुकूल गुलाल का उत्पादन शुरू किया है। यह कार्य कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है। “गॉड टू गॉड” थीम के तहत तैयार गुलाल को पुनः मंदिरों को समर्पित किया जा रहा है।
यह गुलाल पूरी तरह रासायनिक रंगों से मुक्त है और त्वचा के लिए सुरक्षित है। इसकी शेल्फ लाइफ तीन वर्ष तक बताई गई है। पुष्पों से प्राप्त एसेंशियल ऑयल के कारण यह उत्पाद अरोमा थेरेपी के गुणों से भी युक्त है।
पुष्प विज्ञान एवं उद्यान सज्जा विभाग की डॉ. दीप्ति सिंह के नेतृत्व में वर्ष 2023 से गेंदा, गुलाब, मोगरा, अपराजिता, गुड़हल और पलाश जैसे फूलों से दस से अधिक रंगों का गुलाल तैयार किया जा रहा है। साथ ही आकर्षक पैकेजिंग को भी मानकीकृत किया गया है।
विश्वविद्यालय मंदिरों के पुष्प अपशिष्ट से ग्रीटिंग कार्ड, बुकमार्क और अन्य सजावटी उत्पाद भी बना रहा है, जो “कचरे से कंचन” की अवधारणा को साकार करता है।
