झारखंड के जामताड़ा से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां प्रशिक्षित सहायक अध्यापकों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान कर दिया है। वर्षों से लंबित मांगों को लेकर अब शिक्षक आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।

 

जामताड़ा के गांधी मैदान में झारखंड राज्य प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघ और आकलन सफल पास संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिलेभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी 18 अप्रैल को राजधानी रांची में प्रस्तावित आमरण अनशन और धरना कार्यक्रम को सफल बनाना था।

 

बैठक में राष्ट्रीय कमेटी सदस्य सुमन कुमार ने कहा कि सरकार से कई बार मांग करने के बावजूद अब तक न तो वेतनमान मिला है, न ही “समान काम के लिए समान वेतन” लागू किया गया है और न ही शिक्षकों का स्थाईकरण किया गया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अब शिक्षक चुप बैठने वाले नहीं हैं और 18 अप्रैल से 42 हजार शिक्षक मुख्यमंत्री आवास के सामने आमरण अनशन पर बैठेंगे।

 

उन्होंने यह भी बताया कि आकलन परीक्षा को टेट के समकक्ष मान्यता देने की मांग प्रमुख है। साथ ही सरकार से बिहार की तर्ज पर ठोस निर्णय लेने की अपील की गई है, ताकि शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

 

वहीं, जिला अध्यक्ष शब्बीर अंसारी ने कहा कि पिछले 24 वर्षों से पारा शिक्षक के रूप में सेवा देने के बावजूद शिक्षकों को केवल उपेक्षा ही मिली है। उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि अब आंदोलन ही आखिरी रास्ता बचा है।

 

बैठक के अंत में सभी शिक्षकों ने एकजुट होकर रांची में होने वाले आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया। अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि वह इन शिक्षकों की मांगों को लेकर क्या फैसला लेती है।

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