गया: बिहार के गया जिले के चाकंद निवासी 30 वर्षीय संदीप कुमार पाठक अपनी अनोखी पहचान के कारण चर्चा में हैं। दिन में वे विष्णुपद मंदिर से जुड़े पुरोहित परिवार की परंपरा निभाते हुए पूजा-पाठ और पिंडदान कराते हैं, जबकि शाम को अखाड़े में पसीना बहाकर कुश्ती की तैयारी करते हैं। पुजारी और पहलवान की यह अनूठी जोड़ी उन्हें खास बनाती है।
संदीप ने खेल की शुरुआत कबड्डी से की थी। स्कूल में उनका आक्रामक खेल देखकर शिक्षक ने उन्हें कुश्ती अपनाने की सलाह दी। बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के उन्होंने पहली जिला स्तरीय प्रतियोगिता में ही स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित कर दी। इसके बाद उन्होंने मिट्टी के अखाड़े से प्रशिक्षण शुरू किया और फिर मैट कुश्ती में भी अपनी अलग पहचान बनाई।
संदीप अब तक जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग 200 पदक, जिनमें 70 स्वर्ण पदक शामिल हैं, जीत चुके हैं। वर्ष 2023 में बांग्लादेश के ढाका में आयोजित साउथ एशियन सैंबो कुश्ती चैंपियनशिप में 98 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीतकर उन्होंने बिहार का नाम रोशन किया।
शुरुआत में परिवार उनकी पहलवानी के पक्ष में नहीं था। उनका मानना था कि ब्राह्मण परिवार का बेटा इस खेल में आगे नहीं बढ़ पाएगा। लेकिन संदीप ने शुद्ध शाकाहारी भोजन, दूध, घी और बादाम के सहारे खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाकर यह धारणा बदल दी।
वर्तमान में संदीप 105 किलोग्राम भार वर्ग में खेलते हैं। वे खेलो इंडिया मिनी प्रशिक्षण केंद्र में जूनियर खिलाड़ियों को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक दंगल प्रतियोगिता में 1.5 लाख रुपये की इनामी राशि भी जीती।
संदीप को अब बिहार सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना से उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि वे सभी आवश्यक मानकों को पूरा कर चुके हैं और खेल विभाग से नौकरी मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका संघर्ष और उपलब्धियां आज बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।








