बिहार के वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड के फरीदपुर गांव में उस समय मातम छा गया, जब सीआरपीएफ जवान पिंटू कुमार का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव पहुंचा। झारखंड के चाईबासा में ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। जवान की मौत की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
गुरुवार सुबह जैसे ही फूलों से सजी गाड़ी में तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरा इलाका “पिंटू कुमार अमर रहे” और “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा। अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार, जनप्रतिनिधि और आसपास के लोग पहुंचे। हर किसी की आंखें नम थीं और माहौल बेहद भावुक था।
सबसे मार्मिक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब जवान की पत्नी आरती कुमारी अपने पति के पार्थिव शरीर से लिपटकर बिलख पड़ीं। वह बार-बार बेसुध हो रही थीं। उनकी गोद में डेढ़ माह का मासूम बेटा था, जिसे देखकर मौजूद लोगों की आंखें भी छलक उठीं। अंतिम दर्शन के बाद सीआरपीएफ और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में पूरे सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। हजारों लोग इस यात्रा में शामिल हुए। बाद में हाजीपुर के कोनहारा घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
परिजनों के अनुसार पिंटू कुमार वर्ष 2016 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती झारखंड के चाईबासा में थी। ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
पिंटू कुमार अपने पीछे पिता शिवजी साह, माता प्रमिला देवी, पत्नी आरती कुमारी, छह वर्ष की बेटी जूही तान्या, दो वर्ष की बेटी कृति मिशा और मात्र डेढ़ माह के बेटे को छोड़ गए हैं। उनका विवाह 10 दिसंबर 2018 को महुआ थाना क्षेत्र के मौदह सलखन्नी गांव की आरती कुमारी से हुआ था।
जवान के असामयिक निधन से पूरे गांव में मातम पसरा है। ग्रामीणों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से परिवार को इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।








