सहरसा शहर के एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान मासूम बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना ने आम लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर किस डॉक्टर और किस अस्पताल पर भरोसा किया जाए। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के चिकित्सकों ने बच्ची के ब्रेन में पानी होने की बात कहकर ऑपरेशन किया, लेकिन ऑपरेशन के दौरान उसकी मौत हो गई। आरोप यह भी है कि डॉक्टरों ने परिजनों को खून की व्यवस्था करने के बहाने बाहर भेज दिया और इसी दौरान अस्पताल के चिकित्सक व स्टाफ मौके से फरार हो गए।
घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए सहरसा के सिविल सर्जन ने जिले में संचालित निजी क्लीनिकों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।
इस जांच समिति में डॉ. रविंद्र कुमार, डॉ. विवेकानंद सिंह और डॉ. हरिशेखर भारती को शामिल किया गया है। समिति जिले में संचालित सभी निजी क्लीनिकों और अस्पतालों की जांच करेगी। यह देखा जाएगा कि कौन-कौन से क्लीनिक वैध लाइसेंस के साथ संचालित हो रहे हैं और किन संस्थानों का संचालन नियमों के विपरीत किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बिना लाइसेंस संचालित होने वाले क्लीनिकों और अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान आवश्यक दस्तावेज, पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता तथा स्वास्थ्य मानकों का भी सत्यापन किया जाएगा।
यह कार्रवाई ऐसे समय में शुरू हुई है जब हाल की घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। लोगों का कहना है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच निष्पक्ष और प्रभावी होती है तो जिले में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों पर बड़ी कार्रवाई संभव मानी जा रही है।
संवाददाता : इन्द्रदेव, सहरसा






