कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक पातीं। बिहार के नालंदा का 18 वर्षीय बजरंगी कुमार इसकी मिसाल है। कभी सेना में जाने का सपना देखने वाला यह युवा आज परिवार का सहारा बनने के लिए चाय और फास्ट फूड की दुकान चलाता है, लेकिन उसका असली सपना भारतीय रग्बी टीम की जर्सी पहनकर देश का नाम रोशन करना है।
नालंदा मोड़ के पास रहने वाले बजरंगी कुमार चार भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे हैं। कुछ वर्ष पहले उनके पिता मिश्री चौरसिया का हार्ट अटैक से निधन हो गया। इलाज में परिवार की जमा-पूंजी खर्च हो गई, लेकिन पिता को बचाया नहीं जा सका। इसके बाद महज 13 साल की उम्र में बजरंगी ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। आज वह सुबह चाय-नाश्ता और दोपहर में छोला-भटूरा बेचकर प्रतिदिन दो से तीन हजार रुपये तक कमाते हैं और उसी से घर का खर्च चलाते हैं।
संघर्ष के बीच उन्होंने खेल का सपना नहीं छोड़ा। वर्ष 2019 में बड़े भाई को देखकर रग्बी से जुड़ाव हुआ और 2021 में उन्होंने इस खेल को गंभीरता से अपनाया। लगातार मेहनत के दम पर वे अब तक पांच राष्ट्रीय कैंप और कई टूर्नामेंट खेल चुके हैं।
हाल ही में हैदराबाद के गाचीबोवली स्टेडियम में आयोजित जूनियर राष्ट्रीय रग्बी चैंपियनशिप में बिहार ने महाराष्ट्र को 37-5 से हराकर खिताब जीता। इस ऐतिहासिक जीत में बजरंगी ने दो गोल और कुल 10 अंक बनाकर अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बिहार के लिए छह मुकाबले खेले और शानदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा।
बजरंगी अप्रैल 2025 से अब तक औरंगाबाद, पटना, दिल्ली और नवादा में आयोजित राष्ट्रीय कैंपों का हिस्सा रह चुके हैं। अब उनकी नजर राजगीर में होने वाले अगले राष्ट्रीय कैंप और भारतीय टीम में चयन पर है। उनका कहना है कि खेल के जरिए अच्छी नौकरी पाकर वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलना चाहते हैं।
बजरंगी ने सरकार से अपील की है कि आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता मिले, ताकि प्रतिभा संसाधनों की कमी से पीछे न रह जाए। नालंदा का यह युवा साबित कर रहा है कि मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास के दम पर बड़े से बड़ा सपना भी सच किया जा सकता है।







