8 दशक बाद भी सड़क का इंतजार: भागलपुर के वंशीचक गांव में बारिश बनती है सबसे बड़ी मुसीबत

भागलपुर के पीरपैंती प्रखंड अंतर्गत रिफातपुर-सीमानपुर पंचायत का वंशीचक गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। करीब 800 की आबादी वाला यह गांव आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी पक्की सड़क से नहीं जुड़ सका है। सरकार जहां हर गांव तक सड़क पहुंचाने का दावा करती है, वहीं वंशीचक के ग्रामीण आज भी खेतों की पगडंडियों और कच्चे रास्तों के सहारे आने-जाने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, हल्की बारिश होते ही पूरा रास्ता कीचड़ और जलजमाव से भर जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना जोखिम उठाकर पानी और कीचड़ पार करना पड़ता है। वहीं किसी के बीमार होने पर एंबुलेंस या चारपहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।

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गांव पहुंचने के रास्ते में दो स्थानों पर बांस की चचरी का अस्थायी पुल बना है, जो अक्सर टूट जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल टूटने पर प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिलती। गांव के लोग आपस में चंदा जुटाकर इसकी मरम्मत कराते हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण का सिर्फ आश्वासन मिलता रहा, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ।

स्थानीय ग्रामीण विनय कुमार ने बताया कि बरसात के दिनों में गांव पूरी तरह कट जाता है। रात में मरीज या बाहर से लौटने वाले लोगों को खराब रास्ते और अंधेरे के कारण कई बार रेलवे स्टेशन या रिश्तेदारों के यहां रात बितानी पड़ती है।

ग्रामीण रेनू देवी, पंकज यादव, मनोज कुमार सिंह, अजय कुमार सिंह, ललिता देवी, सुलेखा देवी और सोनू सिंह सहित कई लोगों ने बताया कि सड़क नहीं होने से गांव के सामाजिक जीवन पर भी असर पड़ रहा है। खराब रास्ते के कारण कई बार शादी-विवाह के रिश्ते तक टूट जाते हैं।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, एसडीएम और संबंधित विभाग से वंशीचक गांव तक जल्द पक्की सड़क बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अब भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका सवाल है कि विकसित भारत की बात करने वाले दौर में आखिर वंशीचक जैसे गांव अब भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से क्यों वंचित हैं?

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