
बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ से संबद्ध) की प्रमंडलीय शाखा, सहरसा के बैनर तले सोमवार को कर्मचारियों और शिक्षकों ने अपनी 32 सूत्री मांगों को लेकर कोशी प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने कोशी प्रमंडलीय आयुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम मांग-पत्र सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की।
धरना को संबोधित करते हुए महासंघ के प्रमंडलीय मंत्री शरद कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों के कारण कर्मचारियों और शिक्षकों में भारी असंतोष है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों में स्वीकृत पदों के मुकाबले बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं, जिससे कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है। सरकार नियमित नियुक्ति के बजाय संविदा, आउटसोर्सिंग और पीपीपी मॉडल को बढ़ावा दे रही है, जिससे युवाओं का शोषण हो रहा है।
महासंघ ने नई पेंशन योजना (एनपीएस) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग को प्रमुखता से उठाया। साथ ही केंद्र की तर्ज पर हर पांच वर्ष में राज्य वेतन आयोग के गठन, सभी रिक्त पदों पर नियमित बहाली, संविदा एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर कर्मचारियों को नियमित करने, समान कार्य के बदले समान वेतन, न्यूनतम 26 हजार रुपये मानदेय, जनवरी 2020 से लंबित 18 माह के महंगाई भत्ते के एरियर का भुगतान तथा विभिन्न कर्मियों के ग्रेड पे में संशोधन की मांग की गई।
इसके अलावा गृह जिले में पदस्थापन, सप्ताह में पांच कार्यदिवस, सभी कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा तथा फील्ड कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी में शिथिलता की भी मांग की गई।
महासंघ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी 32 सूत्री मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो पूरे बिहार में चरणबद्ध आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरना-प्रदर्शन में विभिन्न विभागों के कर्मचारी, शिक्षक और संघ के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।





