रामपुर निवासी स्वर्गीय सिकंदर चौधरी हत्याकांड को लेकर विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने सोमवार को मेदिनीनगर स्थित कचहरी परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई।
धरना के दौरान वीआईपी नेताओं ने कहा कि 23 मई 2026 को रामपुर में हुई घटना केवल एक हत्या नहीं थी, बल्कि पूरे परिवार और समुदाय को भयभीत करने के उद्देश्य से किया गया सुनियोजित हिंसक हमला था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस हमले में सिकंदर चौधरी की निर्मम हत्या कर दी गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए। घटना में नाबालिग जसवंत चौधरी को गोली लगी थी, वहीं संजय चौधरी भी गोली लगने से गंभीर रूप से जख्मी हुए थे। इसके अलावा मृतक के पिता मधु चौधरी समेत अन्य पर भी लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से हमला किया गया था।
पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि जिला प्रशासन और पुलिस समय रहते प्रभावी कार्रवाई करती, तो इस जघन्य घटना को रोका जा सकता था। इसलिए प्रशासनिक विफलता की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
धरनार्थियों ने आरोप लगाया कि घटना के काफी समय बीत जाने के बावजूद 14 नामजद अभियुक्त अब भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं, जिससे पीड़ित परिवार और गवाहों में भय का माहौल बना हुआ है। उन्होंने अनुसंधान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। नेताओं का कहना था कि केस डायरी के अध्ययन से गवाहों के बयानों को तोड़-मरोड़कर दर्ज किए जाने की आशंका सामने आई है, जिससे आरोपियों को लाभ पहुंच सकता है।
वीआईपी नेताओं ने प्रशासन से शेष आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी, दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई, अनुसंधान की निष्पक्ष जांच, पीड़ित परिवार के पुनर्वास तथा त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संवाददाता : सत्यम शुक्ला, पलामू






