मोहर्रम पर्व के अवसर पर सहरसा में धार्मिक आस्था के साथ-साथ देशभक्ति और वैज्ञानिक सोच का अनूठा संगम देखने को मिला। शहर के डीबी रोड स्थित मछली मार्केट में युवाओं द्वारा तैयार की गई डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और मिसाइल की आकर्षक झांकी लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही। बड़ी संख्या में लोग इस झांकी को देखने पहुंचे और युवाओं के इस रचनात्मक प्रयास की सराहना की।
झांकी में भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” के रूप में दर्शाया गया। उनके साथ मिसाइल की प्रतिकृति को तिरंगे की भव्य सजावट के बीच प्रदर्शित किया गया, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। झांकी का उद्देश्य देशभक्ति, विज्ञान, आत्मनिर्भर भारत और युवाओं को महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेने का संदेश देना था।
मोहर्रम के अवसर पर निकाले गए ताजिया जुलूस में विभिन्न प्रकार की पारंपरिक और धार्मिक झांकियां शामिल थीं, लेकिन डॉ. कलाम पर आधारित यह विशेष प्रस्तुति सबसे अलग और प्रभावशाली नजर आई। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने झांकी के सामने रुककर तस्वीरें लीं और इसकी सराहना की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से ऐसे प्रेरणादायक संदेश समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं। उनका मानना है कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन संघर्ष, शिक्षा, विज्ञान और राष्ट्रसेवा का प्रतीक है, जिससे नई पीढ़ी को सीख लेने की आवश्यकता है।
आयोजकों ने बताया कि इस झांकी को तैयार करने का उद्देश्य केवल आकर्षण पैदा करना नहीं, बल्कि युवाओं में राष्ट्रप्रेम, वैज्ञानिक सोच और महान विभूतियों के आदर्शों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना था। मोहर्रम के इस आयोजन में सांप्रदायिक सौहार्द, सामाजिक एकता और देशभक्ति का संदेश भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला, जिसकी शहरवासियों ने खुलकर प्रशंसा की।संवाददाता : इन्द्रदेव








