पुआल की छत से खाकी वर्दी तक: मजदूर की बेटी रजनी बनी बिहार पुलिस की सिपाही, संघर्ष की मिसाल

गरीबी, अभाव और कठिन संघर्ष के बीच पली-बढ़ी रजनी कुमारी ने बिहार पुलिस में सिपाही पद पर चयनित होकर अपने परिवार और पूरे गांव का नाम रोशन कर दिया है। भजौर गांव के पासवान टोला की रहने वाली रजनी इस टोले की पहली बेटी हैं, जिन्होंने बिहार पुलिस में जगह बनाई है।

 

रजनी के पिता दशरथ पासवान ठेला चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि उनकी मां सुनीता देवी मजदूरी कर घर का खर्च उठाती हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। पिता ने कर्ज लेकर ठेला खरीदा ताकि परिवार चलाने के साथ बेटी की शिक्षा जारी रख सकें।

 

पुआल की छत और टाट की दीवारों वाले कच्चे घर में रहकर रजनी ने अपनी पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वह स्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा हैं। पढ़ाई के साथ उन्होंने बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी की और कड़ी मेहनत के दम पर सफलता हासिल की।

 

रजनी का कहना है कि उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और कहा कि मजदूरी वे करेंगे, लेकिन बच्चों की शिक्षा नहीं रुकनी चाहिए। सफलता की खबर मिलते ही पूरे पासवान टोला में खुशी की लहर दौड़ गई।

 

रजनी की कहानी यह साबित करती है कि यदि हौसला बुलंद हो और परिवार का साथ मिले, तो गरीबी भी सपनों की उड़ान नहीं रोक सकती। उनकी सफलता आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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