समस्तीपुर जिले के रोसड़ा से जुड़े और मूल रूप से बेगूसराय के खोदावंदपुर प्रखंड अंतर्गत मलमल्ला गांव निवासी राजू कुशवाहा (राजू कुमार) ने कठिन संघर्षों के बीच अपनी मेहनत और लगन से सफलता की ऐसी कहानी लिखी है, जो युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
राजू कुमार के जीवन में बचपन से ही संघर्षों की शुरुआत हो गई थी। उनके पिता स्व. कैलाश महतो के निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी अचानक कठिन हो गई। ऐसे समय में उनकी मां रेखा देवी ने हिम्मत नहीं हारी और परिवार को संभालने में अहम भूमिका निभाई। वहीं उनके बड़े भाई राजेश कुमार सुमन, जो एक पर्यावरण सेवी हैं, ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन दिया।
परिवार की कठिन परिस्थितियों के बावजूद राजू ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। वे रोसड़ा में अपने मौसा के घर रहकर शिक्षा प्राप्त करते रहे। आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी हासिल की और रक्सौल मंडल में गेटमैन के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्हें 12-12 घंटे की कठिन ड्यूटी करनी पड़ती थी, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया।
नौकरी और जिम्मेदारियों के बीच भी राजू ने बिना किसी कोचिंग के सेल्फ स्टडी जारी रखी। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करते हुए उन्होंने लगातार मेहनत की और अंततः 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 72वीं रैंक हासिल कर डिप्टी एसपी (DSP) बनने में सफलता प्राप्त की।
उनकी इस उपलब्धि की खास बात यह भी है कि उनकी पत्नी पहले से ही बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर कार्यरत हैं। दोनों की यह सफलता अब समाज में प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
राजू कुमार की यह कहानी साबित करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास से किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है।





