किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड स्थित दल्लेगांव पंचायत से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक दूल्हे को अपनी बारात लेकर दुल्हन के घर पहुंचने के लिए नाव और लोगों के कंधों का सहारा लेना पड़ा, जबकि इलाके में करोड़ों रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया जा चुका है।
मामला दिगली से दल्लेगांव पंचायत को जोड़ने वाली मेची नदी का है। बारात जब नदी किनारे पहुंची तो दूल्हे और बारातियों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई। नदी पार करने के लिए पहले दूल्हे को नाव पर बैठाकर एक हिस्सा पार कराया गया, फिर ग्रामीणों ने उसे कंधों पर बैठाकर आगे पहुंचाया। शादी का यह अनोखा दृश्य अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल निर्माण के लिए वर्षों तक आंदोलन करना पड़ा था। ग्रामीणों ने कई बार विरोध प्रदर्शन किया और वोट बहिष्कार की चेतावनी भी दी। इसके बाद 28 जनवरी 2021 को पुल निर्माण कार्य शुरू हुआ। निर्माण एजेंसी को जनवरी 2023 तक काम पूरा करना था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के करीब साढ़े तीन साल बाद भी पुल पूरी तरह चालू नहीं हो सका।
ग्रामीणों के अनुसार इस परियोजना पर करीब 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अधूरे निर्माण के कारण लोगों को आज भी नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक कार्यक्रमों में भारी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में हालात और गंभीर हो जाते हैं।
दल्लेगांव पंचायत संघर्ष समिति लगातार पुल को जल्द चालू करने की मांग कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता और निर्माण में देरी के कारण हजारों लोगों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
दूल्हे का नाव और कंधों के सहारे दुल्हन के घर पहुंचना केवल एक शादी की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण बिहार की उस हकीकत की तस्वीर है, जहां विकास के बड़े दावे अब भी जमीन पर पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं।






