सहरसा नगर निगम के नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के निलंबन के विरोध में लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी नगर निगम कार्यालय में तालाबंदी जारी रही। इस दौरान पार्षदों एवं पार्षद प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया और नगर आयुक्त के निलंबन के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई। प्रदर्शन कर रहे जनप्रतिनिधियों का कहना है कि निलंबन का फैसला शहर के विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है।
**निलंबन के विरोध में एकजुट हुए पार्षद**
नगर निगम कार्यालय में तालाबंदी के दौरान पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों ने अपना आक्रोश जाहिर किया। उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के कार्यकाल में शहर की विभिन्न समस्याओं के समाधान की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए थे। ऐसे में उनके निलंबन से नगर निगम की कार्यप्रणाली और विकास योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
**विकास कार्य प्रभावित होने की जताई आशंका**
प्रदर्शन कर रहे पार्षदों ने बताया कि नगर आयुक्त के कार्यकाल में शहर की साफ-सफाई, जलजमाव की समस्या, सड़क निर्माण और नाला निर्माण जैसे कार्यों को गति मिली थी। इन कार्यों के माध्यम से शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा था।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि नगर निगम में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए अधिकारियों और पार्षदों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। ऐसे में नगर आयुक्त का निलंबन शहर के विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकता है।
**निलंबन पर पुनर्विचार की मांग**
पार्षदों ने संबंधित अधिकारियों से नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के निलंबन के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। उनका कहना है कि शहर के व्यापक हित और विकास कार्यों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।
लगातार दूसरे दिन नगर निगम में तालाबंदी और विरोध प्रदर्शन के कारण निगम का कामकाज प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल पार्षद अपने विरोध पर कायम हैं और निलंबन वापस लेने की मांग कर रहे हैं।





