
बिहार के सहरसा जिला मुख्यालय स्थित मत्स्यगंधा परिसर में स्थापित श्री रक्त काली चौसठ योगिनी मंदिर कोसी और सीमांचल क्षेत्र का प्रमुख शक्तिपीठ और तंत्र साधना का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। लेकिन स्थानीय कमेटी भंग होने और मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी अधर में लटके रहने के कारण मंदिर की व्यवस्था और रखरखाव प्रभावित हो रहा है। मंदिर परिसर की बदहाल स्थिति को लेकर अब स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
**तीन साल से भंग है स्थानीय कमेटी**
स्थानीय पुजारी भगवान मिश्र ने बताया कि करीब तीन वर्ष पहले मंदिर की स्थानीय कमेटी को भंग कर दिया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी को अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन तब से मंदिर के रखरखाव पर समुचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि कई वर्षों से मंदिर परिसर में रंगाई-पुताई नहीं हुई है। श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान की दानपेटी की भी गिनती नहीं हुई है। ऐसे में दानपेटी में रखी राशि के खराब होने की आशंका भी बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि दीपावली और काली पूजा का पर्व नजदीक है। इस अवसर पर मंदिर में मां काली की भव्य प्रतिमा स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन अब तक परिसर में साफ-सफाई और अन्य तैयारियां शुरू नहीं हुई हैं। कई जगहों पर काई जम गई है। उन्होंने जल्द जीर्णोद्धार और स्थानीय कमेटी के गठन की मांग की है।
**पर्यटन विकास के बीच मंदिर की अनदेखी का आरोप**
वहीं, भगैत महासंघ के अध्यक्ष देवनारायण यादव उर्फ नुनु यादव ने कहा कि मत्स्यगंधा परिसर में ग्लास ब्रिज और सेल्फी पॉइंट जैसे पर्यटन विकास के कार्य हो रहे हैं, लेकिन जिस रक्त काली चौसठ योगिनी मंदिर की वजह से इस स्थल की धार्मिक पहचान है, उसकी अनदेखी हो रही है।
उन्होंने जिला प्रशासन से मंदिर की पुरानी रौनक लौटाने, स्थानीय कमेटी गठित करने और नियमित देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है।
**दीपावली से पहले प्रशासन से पहल की मांग**
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर का समुचित विकास होने से धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन दीपावली और काली पूजा से पहले मंदिर की व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है।





