आरा। भोजपुर जिले के सकड्डी स्थित गोवर्धन मंदिर के समीप आयोजित चतुर्मास महाव्रत सह श्री लक्ष्मी-नारायण महायज्ञ को लेकर गुरुवार को भव्य जलभरी एवं कलश यात्रा निकाली गई। पूज्य स्वामी श्री जनार्दनाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। हाथी, घोड़े और ऊंट के साथ निकली भव्य कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। सुबह से ही यज्ञ स्थल पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।
सोन नदी के तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भरी गई जलधारा
पारंपरिक परिधान में सजे श्रद्धालु सिर पर कलश लेकर यात्रा में शामिल हुए। गाजे-बाजे, भजन-कीर्तन और धार्मिक जयघोष के बीच कलश यात्रा यज्ञ स्थल से निकलकर विभिन्न मार्गों से होते हुए सोन नदी के तट पर पहुंची। यहां वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ कलशों में पवित्र जल भरा गया। इसके बाद यात्रा कुल्हड़िया गांव होते हुए पुनः यज्ञ स्थल पहुंची।
पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। रास्ते में जगह-जगह लोगों की भीड़ जुटी रही। हाथी, घोड़े और ऊंट से सुसज्जित कलश यात्रा आकर्षण का केंद्र बनी रही। हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश
महान संत श्री श्री 1008 त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के कृपापात्र शिष्य स्वामी श्री जनार्दनाचार्य जी महाराज के सानिध्य में आयोजित महायज्ञ का उद्देश्य धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करना है। आयोजकों के अनुसार, ऐसे धार्मिक कार्यक्रम समाज में आपसी सद्भाव, एकता, सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देते हैं।
3 नवंबर को विराट धर्म सम्मेलन, 4 नवंबर को पूर्णाहुति
महायज्ञ के तहत आगामी 3 नवंबर को विराट धर्म सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। वहीं, 4 नवंबर को पूर्णाहुति सह भंडारे का कार्यक्रम होगा। आयोजन समिति को इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। समिति ने क्षेत्रवासियों और धर्मप्रेमियों से आगामी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।
भव्य जलभरी के सफल आयोजन के बाद सकड्डी और आसपास के इलाकों में महायज्ञ को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना हुआ है।






