राजमिस्त्री के बेटे ने रचा इतिहास, आरा की गलियों से ब्रिटिश पार्लियामेंट तक पहुंची डॉ. रजनीश कांत की कहानी

आरा के बेगमपुरा की साधारण गलियों से निकलकर ब्रिटिश पार्लियामेंट तक सम्मान हासिल करने वाले डॉ. रजनीश कांत की कहानी संघर्ष, मेहनत और सफलता की मिसाल है। उनके पिता राजमिस्त्री थे। दूसरों के घरों की नींव मजबूत करते हुए उन्होंने अपने बेटे के भविष्य की नींव रखी। आर्थिक अभाव के बावजूद रजनीश ने बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की।

बोरा चट्टी के एक सामान्य स्कूल से शुरू हुई उनकी पढ़ाई आगे चलकर फिजियोथेरेपी की शिक्षा और पीएचडी तक पहुंची। इसके बाद उन्होंने कनाडा में ऑस्टियोपैथी और स्वीडन में कायरोप्रैक्टिक की एडवांस ट्रेनिंग सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण हासिल किए। पेल्विस मास्टरक्लास जैसे विशेष प्रशिक्षण भी उनके पेशेवर सफर का हिस्सा रहे।

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आज डॉ. रजनीश कांत फिजियोथेरेपी, ऑस्टियोपैथी और कायरोप्रैक्टिक की मैनुअल थेरेपी के क्षेत्र में काम करते हैं। सर्वाइकल, कमर दर्द, सायटिका और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए बड़ी संख्या में लोग उनसे संपर्क करते हैं। पटना के बेउर जेल रोड स्थित Back To Nature Spine Clinic से शुरू हुआ उनका काम मुंबई तक पहुंचा।

उनकी एक सेशन की फीस 30 हजार रुपये तक होने की चर्चा होती है। वहीं, जरूरतमंद मरीजों के लिए निःशुल्क चिकित्सा सेवा देने का दावा भी किया जाता है। सेरेब्रल पाल्सी और विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए मुफ्त उपचार, स्वास्थ्य जागरूकता शिविर और गरीब मरीजों के लिए विशेष समय निकालना उनके सेवा अभियान का हिस्सा बताया जाता है। दावा है कि करीब 50 हजार मरीज उनसे उपचार ले चुके हैं।

उनके पेशेवर सफर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। 29 जून 2024 को दुबई में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और 18 जुलाई 2024 को ब्रिटिश पार्लियामेंट में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन से सम्मान मिलने की बात सामने आई।

हालांकि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कुछ आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। ऐसे आरोपों की सच्चाई का फैसला वायरल पोस्ट से नहीं, बल्कि प्रमाणित शैक्षणिक योग्यता, पेशेवर प्रशिक्षण और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

राजमिस्त्री के बेटे से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का यह सफर बताता है कि अभाव सपनों की राह रोक सकता है, लेकिन मेहनत और हौसले को खत्म नहीं कर सकता।

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