गोपालगंज। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर बुधवार को महागठबंधन के आह्वान पर गोपालगंज जिले के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान महागठबंधन में शामिल दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग तथा केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। कई स्थानों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले भी जलाए गए। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों की जांच कराने की मांग की।
कुचायकोट प्रखंड मुख्यालय पर आयोजित प्रदर्शन का नेतृत्व राजद के प्रखंड अध्यक्ष मुकेश यादव ने किया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उनके अनुसार, मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
महागठबंधन नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। नेताओं का कहना था कि मतदाताओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक आवाज उठाई जाएगी।
जिले के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों पर हुए प्रदर्शन में महागठबंधन के घटक दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, विकासशील इंसान पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भाकपा-माले के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल रहे।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। वहीं, लगाए गए आरोपों और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर निर्वाचन आयोग या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस खबर के लिए उपलब्ध नहीं हो सकी है।






