पटना से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। गांधी जयंती के मौके पर बिहार सरकार ने राज्य की अलग-अलग जेलों में बंद 44 बंदियों को मानवीय आधार पर कारामुक्त करने का फैसला लिया है। जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय बंदी परिहार कमेटी की अनुशंसा के आधार पर इन बंदियों की रिहाई का निर्णय लिया गया है। इनमें लंबे समय से सजा काट रहे बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित बंदी शामिल हैं।
दरअसल, बंदियों को परिहार देने का फैसला सरकार की कैबिनेट में पहले ही लिया जा चुका था। इसके बाद गृह विभाग की ओर से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिला स्तरीय परिहार कमेटी की अनुशंसा और राज्य स्तरीय परिहार कमेटी के फैसले के बाद अब इन बंदियों को जेल से रिहा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
रिहाई पाने वाले बंदियों में बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, दो बंदी 90 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। वहीं आठ बंदी 80 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, जबकि 20 बंदी 70 से 80 वर्ष की आयु के हैं। इसके अलावा गंभीर बीमारी से पीड़ित एक बंदी को भी मानवीय आधार पर कारामुक्त किया जा रहा है।
रिहा होने वालों में एक महिला बंदी भी शामिल हैं, जिन्होंने पूर्णिया जेल में करीब 20 वर्ष की सजा पूरी की है। वहीं रोहतास जेल से 93 वर्षीय रामबृक्ष कोइरी, मधेपुरा से योगेश्वर यादव, 84 वर्षीय हरिवंश राम और 82 वर्षीय रामाशीष यादव समेत अन्य बंदियों को भी रिहाई दी जा रही है।
इसके अलावा सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता को गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के कारण परिहार दिया गया है। जेल प्रशासन की ओर से रिहाई की आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। सरकार की ओर से यह निर्णय मानवीय आधार और संबंधित कमेटियों की अनुशंसा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।






