
भागलपुर। टी.एन.बी. कॉलेज, भागलपुर के राजनीति विज्ञान विभाग और आईक्यूएसी (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में ‘नेपाल और भारत में जेन-ज़ी (Gen Z) आंदोलनों का एक शैक्षणिक विश्लेषण’ विषय पर विभागीय संगोष्ठी एवं आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दक्षिण एशिया में युवाओं के नेतृत्व वाले सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों पर चर्चा की गई।
संगोष्ठी की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष सह प्रोफेसर-इन-चार्ज प्रो. मनोज कुमार ने की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नेपाल के स्वतंत्र सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता पवन थापा मगर रहे। कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर अजीत कुमार ने किया।
नेपाल के जेन-जी आंदोलन का साझा किया अनुभव
मुख्य वक्ता पवन थापा मगर ने नेपाल में हुए जेन-जी आंदोलन से जुड़े अपने प्रत्यक्ष अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने नेपाल के आंदोलन की तुलना भारत में पूर्व में हुए छात्र आंदोलनों से करते हुए दोनों के स्वरूप, संगठन और राजनीतिक दृष्टिकोण पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि उनके आकलन में नेपाल का जेन-जी आंदोलन अपेक्षाकृत अधिक अराजक और कम संगठित था तथा उसमें स्पष्ट राजनीतिक दृष्टिकोण का अभाव दिखाई दिया। इसके विपरीत, उन्होंने भारत में हुए छात्र आंदोलनों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे के भीतर संचालित आंदोलन के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों में सरकार और व्यवस्था की जवाबदेही तथा उत्तरदायित्व पर सवाल उठाए गए।
जेन-जी आंदोलन को नए नागरिक आंदोलन के रूप में बताया
विषय प्रवेश कराते हुए प्रो. मुशफिक आलम ने भारत में जेन-जी आंदोलन को एक नए प्रकार के नागरिक आंदोलन के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
कार्यक्रम में विभाग के डॉ. नवनीत कुमार, डॉ. जैनेंद्र कुमार सहित अन्य संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों को दक्षिण एशिया में युवाओं की सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता, आंदोलनों की प्रकृति और जमीनी स्तर पर नागरिक भागीदारी को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवाओं की बदलती भूमिका और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी को लेकर भी विचार साझा किए। संगोष्ठी का उद्देश्य समकालीन सामाजिक-राजनीतिक घटनाओं को अकादमिक दृष्टिकोण से समझने के लिए विद्यार्थियों को एक मंच उपलब्ध कराना रहा।





