
भागलपुर/पीरपैंती: पंचायतों को नगर परिषद में शामिल करने के प्रस्ताव के विरोध में पीरपैंती प्रखंड मुख्यालय परिसर में गुरुवार को पंचायत जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ भी नारेबाजी की गई।
मानिकपुर पंचायत के मुखिया अरविंद साह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पंचायत से जुलूस निकाला। ग्रामीण पैदल नारेबाजी करते हुए प्रखंड मुख्यालय पहुंचे और धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। पीरपैंती की मुखिया गुलफसा प्रवीण और ओलापुर के मुखिया गुलसागर रजक भी ग्रामीणों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। जिला परिषद सदस्य कैलाश यादव ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया।
धरना को संबोधित करते हुए मुखिया अरविंद साह ने कहा कि नगर परिषद बनाने के प्रस्ताव में पीरपैंती, मानिकपुर और ओलापुर पंचायत के आंशिक क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में आज भी करीब 75 प्रतिशत ग्रामीण कृषि, पशुपालन, मजदूरी और अन्य ग्रामीण गतिविधियों पर निर्भर हैं। ऐसे में पंचायत क्षेत्रों को नगर परिषद में शामिल करने से लोगों की आजीविका और आर्थिक स्थिति प्रभावित होने की आशंका है।
मुखिया गुलफसा प्रवीण ने कहा कि पीरपैंती क्षेत्र हर वर्ष बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित रहता है। यहां की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां ग्रामीण क्षेत्र के अनुरूप हैं। वर्तमान में ग्राम पंचायतों के माध्यम से सरकार की विभिन्न योजनाएं संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि नगर परिषद में शामिल करने से पहले निर्धारित कानूनी मापदंड, वर्ष 2011 की जनगणना और क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों का अध्ययन किया जाना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि तीनों पंचायतों के अधिकांश लोगों की आजीविका कृषि और कृषि मजदूरी पर निर्भर है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।
धरना समाप्त होने के बाद तीनों पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने कहलगांव के एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से जिला पदाधिकारी, भागलपुर को भेजे गए नगर परिषद गठन के प्रस्ताव को वापस लेने और ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को देखते हुए प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की गई।





