जमुई। अधिवक्ता रुपेश कुमार सिंह के साथ पुलिस द्वारा किए गए कथित दुर्व्यवहार के विरोध में सोमवार को जमुई व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। अधिवक्ताओं ने कचहरी मार्ग पर प्रदर्शन कर घटना के प्रति विरोध जताया। न्यायिक कार्य के बहिष्कार के कारण पूरे दिन न्यायालय का कामकाज प्रभावित रहा।
मामले को लेकर जिला विधिज्ञ संघ जमुई की ओर से 27 सितंबर की शाम आमसभा आयोजित की गई थी। आमसभा में घटना पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से न्यायिक कार्य के बहिष्कार का निर्णय लिया गया था। इसके बाद सोमवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ता न्यायालय परिसर और कचहरी मार्ग पर जुटे।
जिला विधिज्ञ संघ के महासचिव अमित कुमार ने आरोप लगाया कि अधिवक्ता रुपेश कुमार सिंह के साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार और अपमानजनक व्यवहार किया। उनका दावा है कि अधिवक्ता को उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना गिरफ्तार किया गया और थाने में उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया। महासचिव ने यह भी आरोप लगाया कि उनका मोबाइल फोन ले लिया गया।
महासचिव ने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके साथ किसी भी तरह का अनुचित व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। संघ ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
संघ ने रखीं पांच मांगें
जिला विधिज्ञ संघ ने प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें अधिवक्ता के साथ हुई घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच, संबंधित पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, अधिवक्ताओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना, गिरफ्तारी में कानूनी प्रक्रिया का पालन तथा पीड़ित अधिवक्ता को उचित राहत और क्षतिपूर्ति देना शामिल है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है तो संघ आगे लोकतांत्रिक और विधिसम्मत तरीके से आंदोलन को तेज करने पर विचार करेगा।
अध्यक्ष सीताराम सिंह और महासचिव अमित कुमार के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कचहरी मार्ग पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पीड़ित अधिवक्ता रुपेश कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए।
संघ ने कहा कि वह कानून के शासन में विश्वास रखता है और पुलिस के कथित दुर्व्यवहार के खिलाफ शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।





