बगहा से बड़ी खबर है, जहां नेपाल से निकलने वाली गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से फिलहाल करीब 5.1 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया जा रहा है। पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह के मुताबिक, रात करीब 9 से 11 बजे तक डिस्चार्ज बढ़कर 6 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है। इसके बाद कल से पानी के स्तर में कमी आने की संभावना जताई गई है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए डीएम तरनजोत सिंह ने गंडक बराज और निचले इलाकों का जायजा लिया। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों को सरकारी वाहनों के जरिए सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। डीएम ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है।
गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से वाल्मीकिनगर, बगहा और आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बगहा-2 प्रखंड के चकदहवा, बिन टोली, झंडू टोला, बंगाली कॉलोनी और लवकुश घाट समेत कई इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कराया जा रहा है। प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक किचन शुरू किया गया है, जहां भोजन, पानी, रहने की व्यवस्था के साथ मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए NDRF, SDRF, SSB और जिला प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। आपदा प्रबंधन, जल संसाधन और वन विभाग भी पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। डीएम और एसपी के साथ एसडीएम चांदनी कुमारी समेत अधिकारी लगातार स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
गंडक के बढ़ते जलस्तर का असर पश्चिम चंपारण के अलावा पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, सारण और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर समेत आसपास के इलाकों में भी पड़ने की आशंका है। बिहार और यूपी प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।








