भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन, उचित मुआवजे की मांग
भागलपुर: कहलगांव प्रखंड की अंतिचक पंचायत में प्रस्तावित विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं उससे जुड़ी विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण का स्थानीय किसानों ने विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया। किसानों ने अपनी कृषि भूमि के बदले उचित मुआवजा देने की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की।
प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजे की राशि वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम है। उनका आरोप है कि जिस दर पर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है, उससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा। किसानों का कहना है कि उनकी अधिकांश जमीन उपजाऊ कृषि भूमि है और यही उनकी आजीविका का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में कम मुआवजे पर जमीन देने से उनके परिवारों के सामने भविष्य में गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
किसानों ने स्पष्ट किया कि वे विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान और क्षेत्र के विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय बनने से क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा। लेकिन विकास के नाम पर किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि भूमि अधिग्रहण से पहले बाजार दर के अनुरूप उचित मुआवजा तय किया जाए तथा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन से वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की। कई किसानों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उन्हें संतोषजनक मुआवजा नहीं मिलता, तब तक वे अपनी जमीन अधिग्रहण के लिए देने को तैयार नहीं होंगे।
इस मुद्दे को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि विश्वविद्यालय जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए किसानों और प्रशासन के बीच सहमति बनना आवश्यक है। फिलहाल किसान प्रशासन से सकारात्मक पहल और जल्द समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं।