
जमुई: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ और घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब सियासत भी गरमा गई है। 19 सितंबर की शाम हुई इस घटना में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। पुलिस के मुताबिक मामले में सात संदिग्धों की पहचान की गई है, जिनमें तीन की गिरफ्तारी हो चुकी है।
घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। तेजस्वी ने जमुई प्रकरण को बिहार में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
इसी बीच राजद नेता डॉ. सुनील कुमार सिंह की मुख्यमंत्री के इस्तीफे की प्रतीक्षा संबंधी सोशल मीडिया टिप्पणी भी चर्चा में है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुराने बयान को भी फिर सामने रखा है। उस बयान में सम्राट चौधरी ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कहा था कि यदि रात में किसी व्यक्ति को उसके गांव में कोई छू दे, तो वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। अब विपक्ष जमुई की घटना के संदर्भ में उसी बयान को राजनीतिक सवाल के तौर पर उठा रहा है।
वहीं पुलिस की कार्रवाई भी लगातार जारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो में नाबालिग पीड़िता की पहचान सामने आने से उसकी निजता और गरिमा प्रभावित हो सकती है। वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने के लिए कार्रवाई की जा रही है और उसे आगे शेयर नहीं करने की अपील की गई है। पुलिस ने वीडियो प्रसारित करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है।
सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया है कि घटना गंभीर है और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में जमुई की घटना अब अपराध और पुलिस जांच के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी मुद्दा बन चुकी है।
हालांकि राजनीतिक बयानबाजी के बीच सबसे अहम सवाल पीड़िता की सुरक्षा, आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई और नाबालिग की पहचान व गरिमा की रक्षा का है। मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई से ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।





