झारखंड के धनबाद स्थित बारामुड़ी खटाल में रहने वाले सैकड़ों परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडराने लगा है। जिला प्रशासन ने करीब 20 एकड़ सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। धनबाद अंचल कार्यालय की ओर से जमीन की मापी, अस्थायी घरों की नंबरिंग और सीमांकन का काम शुरू किया गया है। इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों में चिंता और नाराजगी है। वहीं, परिवारों ने बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए हटाए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
**पूर्व विधायक आबो देवी के नेतृत्व में उपायुक्त से मिले परिवार**
प्रशासनिक कार्रवाई के बीच शुक्रवार को झरिया की पूर्व विधायक आबो देवी के नेतृत्व में खटाल के लोगों का प्रतिनिधिमंडल समाहरणालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त आदित्य रंजन से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं और पुनर्वास की मांग की। आबो देवी ने कहा कि यदि सरकारी जमीन खाली कराना जरूरी है, तो पहले प्रभावित परिवारों के रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। साथ ही, उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए।
पूर्व विधायक के मुताबिक, करीब 21 साल पहले तत्कालीन उपायुक्त बीला राजेश के कार्यकाल में जनता दरबार के माध्यम से बेकारबांध से सैकड़ों खटाल परिवारों को बारामुड़ी में बसाया गया था। ऐसे में वर्षों से यहां रह रहे परिवारों को हटाने से पहले उनके भविष्य पर विचार करना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि उचित व्यवस्था के बिना परिवारों को हटाया गया तो जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, सुंदर यादव ने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई से परिवारों के सामने आवास, रोजी-रोटी और बच्चों की पढ़ाई को लेकर संकट खड़ा हो गया है।
**अवैध गतिविधियों का हवाला देकर प्रशासन ने अपनाया सख्त रुख**
उपायुक्त आदित्य रंजन ने स्पष्ट किया कि बारामुड़ी खटाल की जमीन सरकारी है और इसे हर हाल में अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र से हथियार बरामद होने के साथ ड्रग्स, चरस और अन्य मादक पदार्थों के कारोबार की शिकायतें मिली हैं। एक होटल में युवक की हत्या के मामले में भी खटाल के कुछ युवकों की संलिप्तता की बात सामने आने का उन्होंने उल्लेख किया।
उपायुक्त ने यह भी कहा कि सड़कों पर खुले घूमते मवेशियों से यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और आपराधिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब एक ओर प्रशासन अतिक्रमण हटाने पर अडिग है, तो दूसरी ओर प्रभावित परिवार पुनर्वास की मांग पर कायम हैं। ऐसे में बारामुड़ी खटाल का मामला आने वाले दिनों में और गंभीर हो सकता है।






