सुपौल, बिहार: बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक हाथ पर कलश रखकर मां दुर्गा की आराधना करने वाली एक महिला की दसवें दिन मौत हो गई। बताया जा रहा है कि महिला ने अपने पिता के स्वस्थ होने की मन्नत मांगी थी और उनकी तबीयत में सुधार होने के बाद कठिन व्रत की शुरुआत की थी। लेकिन यह धार्मिक संकल्प उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गया।
पिता के ठीक होने के लिए मांगी थी मन्नत
जानकारी के मुताबिक, महिला के पिता को लकवे का अटैक आया था। उनकी तबीयत में सुधार नहीं हो रहा था। पिता की हालत से परेशान होकर महिला ने मन्नत मांगी कि यदि उनके पिता स्वस्थ हो जाते हैं, तो वह नवरात्र में नौ दिनों तक हाथ पर कलश रखकर मां दुर्गा की आराधना करेंगी। बताया जाता है कि कुछ समय बाद उनके पिता की तबीयत में सुधार हुआ, जिसके बाद महिला ने अपनी मन्नत पूरी करने के लिए व्रत शुरू कर दिया।
दूसरे दिन से बिगड़ने लगी तबीयत
बताया जा रहा है कि व्रत शुरू करने के दूसरे दिन से ही महिला का रक्तचाप यानी बीपी कम रहने लगा था। उनकी तबीयत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें व्रत छोड़ने की सलाह दी थी। हालांकि, महिला ने अपना धार्मिक संकल्प पूरा करने का फैसला किया और नौ दिनों तक व्रत जारी रखा।
नौ दिनों की आराधना पूरी करने के बाद दसवें दिन महिला की अचानक मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई।
भूखे रहने और कम बीपी को बताया जा रहा वजह
बताया जा रहा है कि डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन नहीं करने और बीपी असामान्य रहने से उनकी हालत गंभीर हो गई थी। हालांकि, मौत के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि के लिए चिकित्सकीय जांच की जानकारी जरूरी है।
इस घटना ने परिवार और स्थानीय लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। धार्मिक आस्था और संकल्प अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यह घटना स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने के गंभीर परिणामों की ओर भी ध्यान दिलाती है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि व्रत के दौरान चक्कर आने, अत्यधिक कमजोरी या रक्तचाप कम होने जैसी समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। स्वास्थ्य को खतरे में डालकर व्रत जारी रखना जानलेवा साबित हो सकता है।






