सहरसा। बिहार के सहरसा जिले के बिहरा की बेटी साक्षी ने अपनी उपलब्धि से परिवार और इलाके का नाम रोशन किया है। भारतीय सेना में मिलिट्री नर्सिंग ऑफिसर के रूप में लेफ्टिनेंट बनने वाली साक्षी की सफलता के पीछे देशसेवा की प्रेरणा और परिवार के संस्कारों की अहम भूमिका रही है। उनके पिता राजेश कुमार झा भारतीय सेना में नायक सूबेदार के पद पर देश की सेवा करने के बाद हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं। अब बेटी ने भी सेना में अधिकारी बनकर परिवार के लिए गर्व का नया अध्याय जोड़ा है।
बिहरा की साक्षी बनीं मिलिट्री नर्सिंग ऑफिसर, पिता राजेश कुमार झा सेना से हो चुके हैं सेवानिवृत्त; 21 अक्टूबर को लखनऊ कमांड में करेंगी जॉइन
पिता की वर्दी बनी प्रेरणा
साक्षी ने अपने पिता को लंबे समय तक सेना की जिम्मेदारियां निभाते देखा। उनकी सैन्य सेवा से प्रेरित होकर साक्षी ने भी देशसेवा का रास्ता चुना। उनकी यह उपलब्धि बताती है कि परिवार से मिलने वाली प्रेरणा और लक्ष्य के प्रति समर्पण किस तरह सफलता की राह तैयार कर सकते हैं।
केंद्रीय विद्यालयों से हासिल की शिक्षा
साक्षी ने केंद्रीय विद्यालय रंगापहाड़ कैंट, दीमापुर और केंद्रीय विद्यालय फोर्ट विलियम, कोलकाता से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मिलिट्री नर्सिंग ऑफिसर बनने के लिए दिल्ली में प्रशिक्षण पूरा किया। लेफ्टिनेंट बनने के साथ अब उनके सैन्य जीवन में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत होने जा रही है।
मिलिट्री नर्सिंग ऑफिसर के रूप में साक्षी को सेना के जवानों और अधिकारियों की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। इस क्षेत्र में चिकित्सा ज्ञान, अनुशासन, संवेदनशीलता और सेवा भावना का विशेष महत्व है।
बिहरा के साथ पंचगछिया का भी बढ़ाया मान
साक्षी का ननिहाल सहरसा जिले के पंचगछिया गांव में है। उनके नाना तुला कृष्ण झा पंचगछिया के पूर्व सरपंच रह चुके हैं। उनके नाना-नानी आज भी गांव में रहते हैं। ऐसे में साक्षी की उपलब्धि से उनके मायके और ननिहाल, दोनों परिवारों में खुशी का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, साक्षी आगामी 21 अक्टूबर को लखनऊ कमांड में जॉइन करेंगी, जहां से उनके सैन्य जीवन का अगला अध्याय शुरू होगा।
साक्षी की सफलता उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पूरा कर देश और समाज के लिए कुछ करना चाहती हैं। पिता की देशसेवा से प्रेरणा लेकर सेना में अधिकारी बनने तक का उनका सफर मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। सहरसा की इस बेटी की उपलब्धि पर क्षेत्र के लोगों को गर्व है।






