सारण जिले के मकेर इलाके में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने राहत व्यवस्था को लेकर सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाए। बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने राहत सामग्री और प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी ली। इसी दौरान उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दूसरे राज्यों में बाढ़ और आपदा के समय बड़े नेता और उद्योगपति मदद के लिए आगे आते हैं, लेकिन बिहार के बाढ़ पीड़ितों के लिए वैसी पहल क्यों नहीं दिखाई देती।
पप्पू यादव ने अडानी और अंबानी का नाम लेते हुए भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों को भी बड़े स्तर पर मदद की जरूरत है। वहीं, स्थानीय नेताओं की मौजूदगी को लेकर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर अभी चुनाव होता तो इलाके में 10-12 हेलीकॉप्टर दिखाई देते। उनका आरोप था कि चुनाव के समय जनता के बीच पहुंचने वाले नेता आपदा के समय उतने सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं।
पप्पू यादव ने बाढ़ राहत के पैसों में कथित बंदरबांट का आरोप भी लगाया। हालांकि, यह उनका आरोप है और मौके पर उन्होंने इसके समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया। अब इन आरोपों पर प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
दौरे के दौरान एक बाढ़ प्रभावित युवक ने पप्पू यादव को बताया कि उसे राहत के नाम पर तीन रुपये वाला पारले-जी मिल रहा है। इस पर पप्पू यादव ने तंज करते हुए कहा कि जब सारा पैसा चुनाव लड़ने में लग गया, तो पारले-जी ही मिलेगा।
फिलहाल सारण में बाढ़ प्रभावित परिवारों की प्राथमिकता राहत, भोजन, दवा और सुरक्षित स्थान है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि जरूरी सामग्री और सुविधाएं हर प्रभावित परिवार तक समय पर पहुंचाई जाएं। वहीं, पप्पू यादव के आरोपों के बाद राहत व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। अब निगाह सरकार और प्रशासन के जवाब पर है।






