नवादा: बिहार के नवादा जिले के सकरा गांव के रहने वाले सेवानिवृत्त नायब सूबेदार धर्मेंद्र कुमार के लिए 5 सितंबर 2026 का दिन जिंदगी के सबसे गौरवपूर्ण और भावुक पलों में शामिल हो गया। चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी यानी ओटीए में पासिंग आउट परेड के दौरान जब उनके बेटे निखिल कुमार ने भारतीय सेना की वर्दी पहनकर अधिकारी के रूप में कदम बढ़ाया, तो पिता की आंखों में गर्व साफ नजर आया।
सबसे भावुक पल तब आया, जब धर्मेंद्र कुमार ने अपने वर्दीधारी बेटे को सलामी दी। इसके बाद निखिल ने पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। बेटे की सफलता से अभिभूत पिता ने उसे कंधे पर उठाकर अपनी खुशी का इजहार किया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी बेहद भावुक रहा।
दरअसल, धर्मेंद्र कुमार खुद भारतीय सेना में अधिकारी बनना चाहते थे, लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। सैन्य सेवा के दौरान वे 23 राष्ट्रीय राइफल्स में कैप्टन निखिल की प्लाटून में तैनात रहे थे। कैप्टन निखिल के नेतृत्व, अनुशासन और सैन्य व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उन्होंने तय किया था कि यदि उनके घर बेटा हुआ तो उसका नाम निखिल रखेंगे।
साल 2002 में बेटे के जन्म के बाद उन्होंने अपना यह संकल्प पूरा किया। इसके बाद धर्मेंद्र कुमार ने बेटे को सेना में अधिकारी बनाने का लक्ष्य तय किया और बचपन से ही उसे अनुशासन, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण की सीख दी।
निखिल कुमार ने अपने दूसरे प्रयास में सैन्य अधिकारी बनने में सफलता हासिल की। उनकी 12वीं तक की पढ़ाई आर्मी स्कूल में हुई। पढ़ाई के साथ वे फुटबॉल में भी सक्रिय रहे और कर्नाटक की अंडर-16 टीम का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु से बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री हासिल की और स्नातक के बाद सेना में अधिकारी बनने की तैयारी शुरू की।
5 सितंबर को चेन्नई ओटीए में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद निखिल को सेना में कमीशन मिला। वर्ष 2015 में नायब सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए धर्मेंद्र कुमार ने बेटे की इस सफलता को अपने अधूरे सपने के पूरा होने जैसा बताया है।






