भागलपुर। नाथनगर प्रखंड के मसकन, बरारीपुर और चंपानगर गांव में चीता देखे जाने की सूचना मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों के बीच जंगली जानवर को लेकर डर का माहौल बन गया। सूचना मिलने के बाद भागलपुर वन विभाग ने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा।
भागलपुर के वन प्रमंडल पदाधिकारी को इन गांवों में चीता पाए जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही वन प्रमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर वन विभाग की रेस्क्यू टीम संबंधित इलाकों में पहुंची और काफी देर तक आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन की।
खोजबीन के दौरान टीम को जमीन पर एक जंगली जानवर के पैरों के निशान दिखाई दिए। पैरों के निशान मिलने के बाद टीम ने मौके पर उनकी बारीकी से जांच की। वन विभाग की टीम ने निशान की बनावट और आकार का अनुसंधान करने के बाद स्पष्ट किया कि यह चीता का नहीं, बल्कि जंगली बिल्ली का पैरों का निशान है।
वन विभाग की टीम ने मिले पैरों के निशान की पहचान और रिकॉर्ड के लिए उसका जीपीएस फोटोग्राफ भी लिया। जांच के बाद चीता देखे जाने की सूचना की पुष्टि नहीं हुई, जिससे इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली।
वन विभाग की रेस्क्यू टीम में वनरक्षी सुबोध दास, शुभम कुमार, मो. मुमताज, मो. अरशद और बीरबल कुमार मौजूद रहे। टीम ने गांव और आसपास के क्षेत्रों में काफी देर तक खोजबीन की और ग्रामीणों से भी जानकारी ली।
वन विभाग की जांच के मुताबिक, पैरों के निशान जंगली बिल्ली के पाए जाने से यह स्पष्ट हुआ कि इलाके में चीता होने की बात सही नहीं थी। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग की टीम ने स्थिति पर नजर बनाए रखी।
चीता देखे जाने की खबर फैलने के बाद स्थानीय लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया था। कई लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी सावधानी बरत रहे थे। वन विभाग की जांच के बाद ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
फिलहाल मसकन, बरारीपुर और चंपानगर में चीता होने की पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग की टीम द्वारा मिले पैरों के निशान को दर्ज कर लिया गया है और जरूरत पड़ने पर क्षेत्र में निगरानी और खोजबीन जारी रखी जाएगी।






