मुजफ्फरपुर: बिहार में शराबबंदी को करीब 10 साल हो चुके हैं, लेकिन शराब की तस्करी पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है। तस्कर पुलिस और उत्पाद विभाग को चकमा देने के लिए आए दिन नए-नए तरीके अपना रहे हैं। मुजफ्फरपुर में शराब तस्करी का ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां नोटबुक के बंडलों के बीच शराब की बोतलें छिपाकर ले जाई जा रही थीं।
दरअसल, मुजफ्फरपुर उत्पाद विभाग को सूचना मिली थी कि भीखनपुर इलाके में ई-ऑटो के जरिए शराब की खेप पहुंचाई जाएगी। सूचना के आधार पर उत्पाद इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार राम के निर्देश पर टीम गठित की गई। एसआई राजा जन्मेजय के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई करते हुए संदिग्ध ई-ऑटो को रोककर उसकी तलाशी शुरू की।
नोटबुक के बीच छिपी थी शराब
तलाशी के दौरान ऑटो में तीन बोरियां मिलीं। पहली नजर में इन बोरियों में नोटबुक के बंडल दिखाई दे रहे थे। लेकिन शराब की खेप की सूचना पहले से होने के कारण टीम ने बारीकी से जांच की। जब नोटबुक के बंडलों को खोलकर देखा गया तो पुलिस के भी होश उड़ गए। करीब 18 बंडलों की नोटबुक के बीच का हिस्सा काटकर उसमें शराब की बोतलें छिपाई गई थीं।
दो बोरियां ऑटो के पीछे खाली जगह में रखी गई थीं, जबकि तीसरी बोरी पीछे की दोनों सीटों के बीच रखी गई थी। तलाशी के दौरान उत्पाद विभाग की टीम ने कुल 360 शराब की बोतलें बरामद कीं और ई-ऑटो को जब्त कर लिया।
एक ट्रिप के मिलते थे एक हजार रुपये
मामले में ऑटो चालक मो. सद्दाम अंसारी को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में उसने बताया कि शराब की खेप उसे प्रिंस नाम के व्यक्ति ने दी थी। एक ट्रिप में शराब पहुंचाने के बदले उसे एक हजार रुपये मिलने थे। चालक ने खुद को इस नेटवर्क में नया बताया है।
उत्पाद विभाग अब प्रिंस समेत शराब तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि शराब की खेप कहां से आई और इसे मुजफ्फरपुर में किसे पहुंचाया जाना था।





