मुजफ्फरपुर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मुजफ्फरपुर के कई परिवारों के लिए जिंदगी भर याद रहने वाला बन गया। शहर के अलग-अलग अस्पतालों में जन्माष्टमी के दिन 55 बच्चों ने जन्म लिया। नवजातों की किलकारियों से अस्पताल परिसर में उत्सव जैसा माहौल नजर आया।
सबसे खास बात यह रही कि कई परिवारों ने जन्माष्टमी पर अपने घर आए नन्हे मेहमान को भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद माना। कुछ परिजनों ने नवजात बच्चों को कृष्ण और राधा की तरह सजाया, तो कुछ ने बच्चों के नाम भी भगवान कृष्ण और राधा से जुड़े रखने का फैसला किया।
केजरीवाल मेटर्निटी अस्पताल में रात 12 बजे से शुक्रवार दोपहर तक 10 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें पांच लड़के और पांच लड़कियां शामिल हैं और अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक सभी बच्चों का जन्म सामान्य प्रसव से हुआ।
वहीं शहर के एक बड़े निजी अस्पताल में जन्माष्टमी के दिन 15 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें आठ लड़के और सात लड़कियां हैं। छह बच्चों का जन्म सीजेरियन डिलीवरी से हुआ। सदर अस्पताल में भी 10 नवजातों का जन्म हुआ, जिनमें आठ लड़के और दो लड़कियां शामिल हैं।
उत्तर बिहार के बड़े अस्पताल एसकेएमसीएच में सबसे ज्यादा 20 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 13 लड़के और सात लड़कियां हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे के जन्म का समय मुख्य रूप से प्राकृतिक प्रक्रिया और चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हालांकि कुछ परिवार शुभ तिथि को प्राथमिकता देते हैं। अगर मेडिकल स्थिति अनुकूल हो, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार सीजेरियन डिलीवरी की तारीख तय की जा सकती है। सामान्य प्रसव का समय प्राकृतिक प्रक्रिया से ही निर्धारित होता है।
जन्माष्टमी के दिन पोता-पोती और नाती-नातिन बनने वाले परिजन बेहद खुश नजर आए। किसी ने इसे भगवान कृष्ण का आशीर्वाद बताया, तो किसी ने कहा कि उनके घर खुद नंदलाल आए हैं।
कई परिवारों ने मिठाइयां बांटीं, भजन-कीर्तन और सोहर गाए। नवजातों की किलकारियों के बीच अस्पतालों का माहौल भी जन्माष्टमी के रंग में रंगा नजर आया।
यानी इस बार मुजफ्फरपुर में जन्माष्टमी सिर्फ आस्था का पर्व नहीं रहा, बल्कि 55 परिवारों के लिए नए जीवन और नई खुशियों के आगमन का यादगार दिन बन गया।





