नालंदा: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर भारतीय संसद के राज्यसभा सचिवालय स्थित बालयोगी सभागार में देशभक्ति और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस प्रतिष्ठित समारोह में बिहार के नालंदा जिले के चर्चित कवि संजीव कुमार मुकेश अपनी ओजस्वी और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कविताओं का पाठ करेंगे। अपने मौलिक अंदाज और ऊर्जावान प्रस्तुतियों के लिए पहचान बनाने वाले संजीव मुकेश इस ऐतिहासिक मंच से देशभक्ति का संदेश देंगे।
दोपहर 3 बजे शुरू होगा कार्यक्रम: राज्यसभा सचिवालय कर्मचारी मनोरंजन क्लब की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम दोपहर 3 बजे से शुरू होगा। इसमें गीत, संगीत, नृत्य और कविता के माध्यम से भारत की ‘विविधता में एकता’ को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले वीर सपूतों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाएगी। कार्यक्रम में सचिवालय के अधिकारी-कर्मचारियों के अलावा देश के कई जाने-माने कवि-कवयित्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के कलाकार भी शामिल होंगे।
‘गांव का लड़का’ के नाम से पहचान: संजीव कुमार मुकेश मूल रूप से नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड के जीयर गांव के रहने वाले हैं। साहित्य उन्हें विरासत में मिला है। उनके पिता उमेश प्रसाद ‘उमेश’ मगही और हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार हैं। वर्तमान में संजीव मुकेश दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) मुख्यालय में कार्यरत हैं। नौकरी के साथ वह मगही और हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए लगातार जन-जागृति अभियान भी चलाते हैं।
‘यही तो मेरा देश है’ गीत हुआ चर्चित: उनकी प्रमुख रचनाओं में देशभक्ति गीत ‘यही तो मेरा देश है’ खास है। 25 जनवरी 2024 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इस गीत को आकाशवाणी के सभी नेटवर्क पर 22 भारतीय भाषाओं में अनूदित कर प्रसारित किया गया था। इसके अलावा वह सिडनी स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में बिहार दिवस के अवसर पर भी प्रस्तुति दे चुके हैं।
कई सम्मान से हो चुके हैं सम्मानित: संजीव मुकेश ने IIT पटना, ICCR-पटना समेत कई प्रमुख मंचों पर प्रस्तुति दी है। हिंदी और मगही साहित्य में योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। हाल ही में उन्हें ‘प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिहार गौरव सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। इसके अलावा विश्व हिंदी सेवा सम्मान, कैलाश गौतम लोक भाषा सम्मान, छठ सेनानी अवार्ड और भारत मंडपम का ‘बिहार गौरव सम्मान’ भी उन्हें मिल चुका है।
संसद भवन में होने वाले उनके काव्य पाठ को लेकर नालंदा सहित पूरे बिहार में उत्साह है। साहित्य प्रेमी इसे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण मान रहे हैं। उनका यह मंच बिहार की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती देने के साथ युवाओं में राष्ट्रप्रेम और सकारात्मक चेतना का संदेश भी देगा।






