यूरिया संकट के बीच ड्रोन तकनीक बनी किसानों का सहारा, बगहा में नैनो उर्वरक से गन्ने की फसल को मिली नई जान

बगहा: बिहार के बगहा अनुमंडल में यूरिया की भारी किल्लत से जूझ रहे गन्ना किसानों के लिए ड्रोन आधारित नैनो उर्वरक छिड़काव राहत की नई उम्मीद बनकर सामने आया है। बड़गांव क्षेत्र में किसानों ने यूरिया के विकल्प के रूप में ड्रोन से नैनो डीएपी और नैनो उर्वरक 28-28-0 का छिड़काव कराया, जिसके शुरुआती परिणाम काफी उत्साहजनक बताए जा रहे हैं।

किसानों का दावा है कि छिड़काव के महज 48 घंटे के भीतर गन्ने की फसल में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा। यूरिया की कमी से पीली पड़ चुकी पत्तियां फिर से हरी होने लगी हैं और फसल की बढ़वार में भी सुधार देखने को मिला है। इससे किसानों की चिंता काफी हद तक कम हुई है।

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दरअसल, यूरिया की कमी से परेशान किसान अनुमंडल कृषि पदाधिकारी राजेश कुमार के पास पहुंचे थे। समस्या को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरकों के छिड़काव की सलाह दी। इसके बाद अभियान चलाकर बड़गांव में 37 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से नैनो उर्वरकों का छिड़काव कराया गया।

इस अभियान में किसान अखिलेश कुमार, चंदा देवी, अमित मिश्रा, रेखा देवी, मुन्ना साह, मुन्ना चौधरी, मंगल कुमार, संतोष कुमार और बृजेश कुमार सहित कई किसानों ने अपने लगभग दो-दो एकड़ खेतों में इस तकनीक का उपयोग किया। किसानों का कहना है कि ड्रोन से उर्वरक का समान रूप से छिड़काव होता है, समय की बचत होती है और फसल पर इसका असर भी बेहतर दिखाई देता है।

लागत के लिहाज से भी यह तकनीक किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। किसानों के अनुसार ड्रोन किराया और नैनो उर्वरक मिलाकर प्रति एकड़ कुल खर्च 1500 रुपये से कम आता है। नैनो डीएपी लिक्विड की 500 मिलीलीटर बोतल 225 रुपये में उपलब्ध है, जो एक एकड़ के लिए पर्याप्त है।

अनुमंडल कृषि पदाधिकारी राजेश कुमार ने किसानों से आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि बदलती परिस्थितियों में नैनो उर्वरक और ड्रोन तकनीक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। उन्होंने किसानों से कृषि विभाग की सलाह के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने की अपील की। :::**

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