बिहार के शिवहर जिले से खेती की एक अनोखी और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जहां अधिकतर किसान पारंपरिक खेती पर निर्भर हैं, वहीं किसान रणविजय कुमार ने अपनी सोच और प्रयोग से अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अपने बागान में दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले मियाजाकी आम का पेड़ लगाकर इलाके में चर्चा बटोरी है।

करीब तीन साल पहले गांव लौटने के बाद रणविजय कुमार ने शौक के तौर पर बागवानी शुरू की थी। उन्होंने हरियाणा से मियाजाकी आम का पौधा मंगवाकर अपने खेत में लगाया। अब यह पेड़ फल देने लगा है। हालांकि इस बार मौसम की मार के कारण उत्पादन कम रहा और जहां 10 फलों की उम्मीद थी, वहां केवल 4 फल ही प्राप्त हुए। इसके बावजूद इस आम की खासियत और कीमत इसे खास बनाती है। इसकी कीमत लगभग ढाई लाख रुपये प्रति किलो बताई जाती है। किसान का कहना है कि वे इसे बेचने के बजाय खुद खाने के लिए सुरक्षित रखे हैं।

रणविजय कुमार का बागान सिर्फ आम तक सीमित नहीं है। उन्होंने 40 से अधिक प्रकार के सुगंधित फूलों जैसे रातरानी, चंपा और बेला के साथ-साथ अमरूद, जामुन, चेरी, नाशपाती, चीकू, कटहल और चंदन जैसे कई फलदार पेड़ भी लगाए हैं। खास बात यह है कि वे किसी भी रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करते, केवल पानी और प्राकृतिक देखभाल से ही खेती करते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मियाजाकी आम पोषण से भरपूर होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, बीटा-कैरोटीन और कई विटामिन पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

कृषि विशेषज्ञ इसे एक प्रगतिशील पहल मानते हैं। उनका कहना है कि इस आम की खेती के लिए संतुलित तापमान, अच्छी धूप और जल निकासी वाली मिट्टी जरूरी होती है। आधुनिक तकनीकों से इसकी गुणवत्ता और बढ़ाई जा सकती है।

रणविजय कुमार की यह पहल बताती है कि आधुनिक और नवाचार आधारित खेती किसानों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है।

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