बिहार के सहरसा जिला जहां पटुआहा के आम गाछी में उसी गांव के युवक चैतन्य ने जर्मनी की दुल्हनियां मार्था के साथ लिए ‘सात फेरे लिए। हिंदू रीति रिवाज से विधि विधान पूर्वक दोनों की शादी हुई। शादी में दूल्हन की मां, बहन समेत जर्मनी के एक रिश्तेदार के अलावा युवक पक्ष के सभी स्वजन मौजूद थे।

जानकारी के अनुसार, पटुआहा गांव के अमल कुमार झा के पुत्र चैतन्य और मूल रूप से पोलैंड के वारसा के जुनस्क ओरलोवस्की एवं दनुता ओरलोवास्का की पुत्री मार्था की शादी में कई लोग गवाह बने। लड़का के चाचा ध्रुव कुमार झा ने बताया कि चैतन्य की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा सहरसा में हुई। शिलांग से बीटेक करने के बाद बेल्जियम से एमएस की डिग्री हासिल की। जिसके बाद पीएचडी के लिए जर्मनी चले गये।

वहां पढ़ाई के दौरान मार्था जो खुद पीएचडी कर रही हैं उससे जान- पहचान हुई जिसके बाद शादी का प्रस्ताव आया। स्वजनों की रजामंदी से गांव में मिथिला के रीति-रिवाज के अनुसार पूरे विधि विधान से शादी हुई। जर्मनी से लड़की के अलावा उनकी मां, बहन भी आशीर्वाद देने के लिए मौजूद थी। उन्होंने बताया कि फिलहाल मार्था हिंदी नहीं जानती है, परंतु उसने दो माह में हिंदी सीखकर हिंदी में बात करने का भरोसा दिया है।

वैसे उसे दुनिया की आठ भाषाओं का ज्ञान हैं। बताया कि उसे भारत व भारतीय दोनों काफी पसंद हैं। शादी में शामिल ग्रामीण पप्पू झा, मुखिया मुकेश झा, राजीव झा ने बताया कि शादी में हमारे परम्परा के अनुसार सिंदूरदान से लेकर लावा छींटने तक की रस्म अदा की गई।

