मैं अपना गुरु स्वामी रामसुखदासजी महाराज को मानती हूं। उनके वचनों से मैं प्रभावित रही हूं। कथावाचन में महिलाओं की बढ़ती संख्या को मैं अच्छा मानती हूं। यह हमारे युवा वर्ग में संभावित अच्छे बदलाव का संकेत भी है।
सूरजगढ़(झुंझुनूं). कथा वाचक जया किशोरी का कहना है कि मनुष्य का चरित्र उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। चरित्र हमेशा श्रेष्ठ रहना चाहिए। हम सभी को मिलकर मानवता के कल्याण के कार्य करने चाहिए। मूल रूप से चूरू जिले की रहने वाली जया किशोरी का बचपन का नाम जया शर्मा था। उनका परिवार अभी कोलकाता में रहता है। शादी के बारे में उन्होंने कहा कि कोई समझदार व योग्य युवा मिला तो विचार करूंगी। सूरजगढ़ में कथा के दौरान पत्रिका ने उनसे विशेष बात की। पेश है प्रमुख अंश।
सवाल: सवाल प्रारंभिक शिक्षा?
जवाब : मेरी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में हुई। वहीं से मैंने बीकॉम किया।
सवाल: पहली कथा के बारे में बताएं?
जवाब: जन्मस्थान कोलकाता है। उन्हें अपने घर पर ही पूरा धार्मिक वातावरण मिला। घर का माहौल ही इस दिशा की तरफ ले आया। पहली बार नरसी जी को मायरो कथा की। उसके बाद अन्य भी करने लग गई।
सवाल – आपके गुरु कौन है?
जवाब- मैं अपना गुरु स्वामी रामसुखदासजी महाराज को मानती हूं। उनके वचनों से मैं प्रभावित रही हूं।
सवाल: शादी को लेकर चर्चा चल रही है?
जवाब: बहुत समझदार व परिपक्व युवा मिलेगा तो इस पर भी विचार करूंगी। फिलहाल मैंने इस तरफ ज्यादा नहीं सोचा है।
सवाल – कथा वाचन में महिलाओं की संख्या अच्छी खासी देखी जा रही है, आप क्या कहेंगी?जवाब- कथावाचन में महिलाओं की बढ़ती संख्या को मैं अच्छा मानती हूं। यह हमारे युवा वर्ग में संभावित अच्छे बदलाव का संकेत भी है।
सवाल- रामायण में संगीत का उल्लेख मिलता है। भागवत में गायन की परम्परा कब शुरू हुई?
जवाब – भागवत कथा में गीत संगीत ही प्रमुख है। आम श्रद्धालु और भक्त को भाव गायन में विशेष रूचि रहती है। बदलते परिवेश में यह परिस्थिति एक अहम पड़ाव है जबकि कथामृत के पान को गीत-संगीत से अच्छा बल मिलता है।
सवाल – आपके प्रवचनों में मुख्य संदेश क्या रहता है?
जवाब- मैं मानवता की विशेष पक्षधर हूं। मनुष्य के चरित्र और आचरण की शुद्धि को अपनी कथा में उल्लेख करती हूं। यहीं मेरा मन रमता है। व्यक्ति को सत्य, दया, पवित्रता का उपदेश देकर मौजूदा परिवेश को उत्तम बनाना चाहिए। सत्य सर्वोपरि है। युवावर्ग को श्रीकृष्ण की भक्ति की तरफ प्रेरित कर रही हूं।
सवाल: भागवत कथाओं में संस्कृत कम बोली जाने लगी है, कारण क्या है?
जवाब: संस्कृत भाषा को उसका पूर्व गरिमामय स्थान दिलाने में अथक प्रयास की जरूरत है।
सवाल – जीव और परमात्मा में भेद विषय पर क्या विचार हैं?
जवाब- जीव ईश्वर का अंश है और परमात्मा उसका अंशी है। ईश्वर की कृपा से ही जीव का आना और जाना बना हुआ है। आदिगुरु शंकराचार्य ने जीव को लहरों के माध्यम से समझाया है एक ही होने पर भी वे पृथक दिखाई पड़ते हैं परंतु है ईश्वर का ही रूप।
