पश्चिम बंगाल चुनाव के अंतिम चरण के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। बीजेपी ने अपने स्तर पर पूरी रणनीति बना ली है और अब सिर्फ केंद्रीय नेतृत्व की अंतिम मुहर का इंतजार है।
सूत्रों के मुताबिक 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल चुनाव के आखिरी चरण की वोटिंग के बाद बिहार में कैबिनेट विस्तार कभी भी हो सकता है। इस विस्तार में जातीय, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को खास प्राथमिकता दी जाएगी। पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित, महिला और युवा चेहरों को शामिल करने की तैयारी है।
राजनीतिक गलियारों में जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें विजय सिन्हा, मंगल पांडे, दिलीप जायसवाल, रामकृपाल यादव, संजय सिंह टाइगर, सुरेंद्र प्रसाद मेहता, रमा निषाद, श्रेयसी सिंह, लखेन्द्र पासवान और प्रमोद चंद्रवंशी शामिल हैं। माना जा रहा है कि इन नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिलना लगभग तय है।
विजय सिन्हा की भूमिका पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले विजय सिन्हा को फिर से बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। उन्हें भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष या विधानसभा अध्यक्ष जैसे अहम पद दिए जाने की चर्चा है।
वहीं युवा चेहरों में नीतीश मिश्रा का नाम सबसे आगे है। विदेश से पढ़ाई कर चुके और उद्योग मंत्री के रूप में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नीतीश मिश्रा को इस बार बड़ा रिवॉर्ड मिल सकता है।
दलित समाज से आने वाले जनक राम, पूर्व मंत्री नीरज बबलू, हरि साहनी और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी मंत्रिमंडल की दौड़ में शामिल हैं। खासकर कोसी क्षेत्र से प्रतिनिधित्व को लेकर नीरज बबलू की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं।
अब सबकी निगाहें केंद्रीय नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। बंगाल चुनाव खत्म होते ही बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
