बिहार के सहरसा जिले के रौता गांव के वार्ड 11 से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी मेहनत, लगन और सीखने का जुनून होता है। दसवीं कक्षा के छात्र मयंक ने केवल स्मार्टफोन के सहारे कोडिंग सीखकर तकनीक की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर Samsung ने उन्हें बिजनेस पार्टनर के तौर पर काम करने का अवसर दिया है।
मयंक ने बताया कि उन्होंने कभी लैपटॉप या कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं किया। खाली समय में दूसरे बच्चों की तरह मनोरंजन वाले वीडियो देखने के बजाय वे यूट्यूब और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कोडिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े वीडियो देखते थे। धीरे-धीरे उन्होंने HTML, CSS और JavaScript जैसी प्रोग्रामिंग भाषाएं सीख लीं। लगातार अभ्यास करते हुए उन्होंने मोबाइल ब्राउजर पर ही कोड लिखना शुरू किया और वहीं से उनका पहला ऐप तैयार हुआ।
मयंक ने अपने प्रोजेक्ट्स और ऐप्स ईमेल के जरिए सैमसंग कंपनी तक पहुंचाए। कंपनी को उनका काम काफी पसंद आया और उन्हें पहले सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में मौका मिला। बाद में उनके बनाए एक खास ऐप से प्रभावित होकर कंपनी ने उन्हें ‘Samsung Remote Test Lab’ जैसी सुविधाओं का एक्सेस भी दिया। इस तकनीक की मदद से मयंक दुनिया के अलग-अलग सैमसंग स्मार्टफोन्स को ऑनलाइन टेस्ट कर अपने ऐप्स की जांच कर सकते हैं।
उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें ‘Global Innovator 2026’ सम्मान से भी नवाजा गया है। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना पूरे सहरसा जिले के लिए गर्व की बात बन गया है। मयंक की मां ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि बेटा मोबाइल पर समय बर्बाद कर रहा है, लेकिन बाद में जब पता चला कि वह कोडिंग सीख रहा है तो परिवार ने उसका पूरा साथ दिया।
मयंक की कहानी आज गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर सीखने का जज्बा हो तो स्मार्टफोन भी सफलता का सबसे बड़ा हथियार बन सकता है।


