भागलपुर। जिले में बाढ़ से प्रभावित करीब 60 हजार पशुओं के लिए पशुपालन विभाग की ओर से सभी प्रखंडों में चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित पशुपालकों और विस्थापित पशुओं को राहत देने के लिए पशु राहत शिविरों में 24×7 चिकित्सा सुविधा के साथ कृमिनाशक दवाओं का वितरण भी किया जा रहा है।
विभाग की ओर से पॉलिटेक्निक कॉलेज, बरारी और बाल निकेतन राहत शिविरों में पशुचारे की व्यवस्था की गई है। वहीं, जिले के अन्य पशु राहत शिविरों में मौजूद पशुओं की संख्या का लगातार आकलन किया जा रहा है, ताकि जरूरत के अनुसार जल्द से जल्द चारा उपलब्ध कराया जा सके।
विभागीय निर्देश के अनुसार बड़े पशुओं, यानी गाय और भैंस के लिए 6 किलोग्राम प्रति पशु प्रतिदिन, जबकि छोटे पशुओं जैसे बछड़ा, बछड़ी, पाड़ा और पाड़ी के लिए 3 किलोग्राम प्रति पशु प्रतिदिन की दर से तीन दिनों के लिए पशुचारा उपलब्ध कराया जा रहा है।
38 पशु चिकित्सा पदाधिकारी राहत कार्य में तैनात
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिले में पर्याप्त चिकित्सा दल सक्रिय किया गया है। जिले के कुल 32 पशु चिकित्सा पदाधिकारियों के अलावा क्षेत्रीय निदेशक पशुपालन, भागलपुर क्षेत्र के समन्वय से पड़ोसी जिलों से भी 6 पशु चिकित्सा पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। इस तरह कुल 38 पशु चिकित्सा पदाधिकारी राहत कार्य में लगाए गए हैं।
विभाग की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुओं के इलाज, दवा और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ पशुपालकों को आवश्यक सहायता देने का काम लगातार किया जा रहा है।
पशु क्षति की सूचना तत्काल देने की अपील
जिला पशुपालन पदाधिकारी, भागलपुर के निर्देश पर मीडिया प्रभारी डॉ. संतोष कुमार ने प्रभावित पशुपालकों से अपील की है कि आपदा के दौरान यदि उनके किसी पशु की मृत्यु या अन्य क्षति होती है तो इसकी सूचना तत्काल अपने क्षेत्र के अंचलाधिकारी, थाना प्रभारी और पशु चिकित्सा पदाधिकारी को दें।
समय पर सूचना मिलने से पशु क्षति से संबंधित अनुग्रह मुआवजे की विधिवत कार्रवाई समय पर पूरी की जा सकेगी। विभाग ने पशुपालकों से प्रशासन के संपर्क में रहने और पशुओं की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने की अपील की है।





