भागलपुर। गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर का असर अब ग्रामीण और दियारा क्षेत्रों के साथ-साथ भागलपुर के शहरी इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 1, 9 और 10 में बाढ़ का पानी कई घरों में प्रवेश कर गया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई परिवार घर छोड़कर छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों की तस्वीरें भयावह स्थिति बयां कर रही हैं। चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। घरों के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं, जबकि गलियों में भी बाढ़ का पानी बह रहा है। पानी घरों तक पहुंचने के कारण लोगों का सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
जरूरत का सामान लाने के लिए लोगों को पानी के बीच से होकर आने-जाने की मजबूरी बनी हुई है। बाढ़ के बीच खाने-पीने का सामान, बच्चों की जरूरत की चीजें और रोजमर्रा का जरूरी सामान जुटाना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, शहरी क्षेत्र के कुछ स्कूलों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि घरों में पानी घुसने के बाद उनका पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है।
वहीं, शांति समिति के सदस्य और समाजसेवी संजय कुमार यादव ने बताया कि नगर निगम का वार्ड नंबर 19 भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है और यहां जलस्तर काफी ऊंचा है। उनका कहना है कि प्रभावित लोगों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल राहत उपलब्ध कराने के साथ-साथ बाढ़ के बाद स्थायी समाधान की दिशा में काम करने की मांग की। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ और कटाव की समस्या सामने आती है, इसलिए सुखाड़ के समय ही कटाव रोधी और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े स्थायी कार्य किए जाने चाहिए।
फिलहाल, गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच शहरी इलाकों में बिगड़ते हालात प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गए हैं। प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत, सुरक्षित स्थान और जरूरी सुविधाओं की जरूरत है।






