सहरसा। क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान, अगवानपुर में मंगलवार से उत्तराखंड के किसानों और कृषि पदाधिकारियों के लिए तीन दिवसीय अंतर्राज्यीय भ्रमण-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह के संरक्षण और निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 8 से 10 सितंबर 2026 तक चलेगा।
प्रशिक्षण में उत्तराखंड के हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, गढ़वाल और नैनीताल जिलों से पहुंचे किसान मखाना की वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी ले रहे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सह निदेशक अनुसंधान, क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान अगवानपुर, डॉ. दिलीप कुमार महतो की मौजूदगी में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडन भारती कृषि महाविद्यालय, अगवानपुर के प्राचार्य डॉ. बिनोद कुमार ने की।
इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड के मुख्य उद्यान पदाधिकारी डॉ. तेजपाल सिंह, मोहम्मद हुसैन और सहायक विकास पदाधिकारी किरण पाल सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम में क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने भी हिस्सा लिया।
डॉ. दिलीप कुमार महतो ने प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए किसानों को मखाना उत्पादन से जुड़ी विभिन्न वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने की अपील की।
प्राचार्य डॉ. बिनोद कुमार ने कहा कि बिहार मखाना उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। मखाना की वैज्ञानिक खेती सीखने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से किसान बिहार पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तराखंड के किसानों के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया है।
तकनीकी सत्र में कनीय वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने मखाना की बुआई से लेकर कटाई तक की वैज्ञानिक प्रक्रिया समझाई। वहीं डॉ. सुनीता पासवान, डॉ. अबू नैयर, डॉ. एम.डी. ओझा, डॉ. राजकिशोर कुमार और डॉ. राधेश्याम ने खेती के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की और किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. एम.डी. ओझा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। प्रशिक्षण के पहले दिन का तकनीकी सत्र इसी के साथ संपन्न हुआ।





