गोपालगंज में नेपाल में हुए भूस्खलन और बाढ़ का असर अब गंडक नदी में भी दिखाई दे रहा है। नेपाल की त्रिशूली नदी क्षेत्र में भूस्खलन के बाद गंडक में बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां, मवेशी, लकड़ियां और गैस सिलेंडर बहकर पहुंच रहे हैं। वहीं, नदी में आई विशालकाय मछलियों को पकड़ने के लिए स्थानीय मछुआरे जाल लेकर उतर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी में नहीं उतरने की अपील की है।
गुरुवार को वाल्मीकिनगर गंडक बराज से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के दौरान नदी का बहाव काफी तेज रहा। इसी बीच नेपाल की ओर से बहकर आई बड़ी-बड़ी मछलियों को देखने के लिए वाल्मीकिनगर से लेकर धनहा के गौतम बुद्ध सेतु तक लोगों की भीड़ जुट गई। मछुआरों के मुताबिक कुछ मछलियों का वजन 40 से 50 किलो, जबकि एक मछली करीब 100 किलो की बताई जा रही है।
मछुआरों का कहना है कि ये मछलियां नेपाल के बाढ़ के पानी के साथ गंडक में पहुंची हैं। इनमें रोहू, कतला, मांगुर और अन्य प्रजातियों की मछलियां शामिल हैं। मंगलपुर और वाल्मीकिनगर क्षेत्र में भी बड़ी मछलियां पकड़ी गई हैं। स्थानीय मछुआरे महाजाल, फेंका जाल और कांटे की मदद से मछलियां पकड़ रहे हैं। पकड़ी गई मछलियां 200 से 400 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं, जिससे स्थानीय मछुआरों को आर्थिक फायदा हो रहा है।
हालांकि, गंडक नदी का तेज बहाव बेहद खतरनाक है। इसके बावजूद कई लोग नदी में उतरकर बहकर आ रही सामग्री निकालने की कोशिश कर रहे हैं। धनहा पुल के पास लोगों की भीड़ के कारण मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति भी बन गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को हटाकर यातायात बहाल कराया। नदी से मिले कुछ गैस सिलेंडरों को पुलिस ने जब्त किया है।
प्रशासन ने नदी में उतरने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है और छोटी नावों के परिचालन पर रोक लगा दी गई है। वहीं, गंडक में शव बहकर आने की सूचना की भी जांच की गई, लेकिन एसडीआरएफ को कोई शव नहीं मिला। प्रशासन और वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि नदी में किसी जंगली जानवर या संदिग्ध वस्तु के दिखाई देने पर तुरंत सूचना दें।





