पटना: आज ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर पूरे बिहार में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा कर रही हैं. पटना समेत मसौढ़ी अनुमंडल क्षेत्र के मंदिरों और गांवों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का माहौल बना हुआ है.
राम जानकी ठाकुरवाड़ी मंदिर, मणीचक धाम, कैलूचक और संघत पर स्थित वट वृक्षों के नीचे महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी. महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा की थाली के साथ वट वृक्ष के पास पहुंचीं और विधि-विधान से पूजा की. कई स्थानों पर मेले जैसा दृश्य देखने को मिला. महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर कच्चे सूत का धागा बांधा और फल-फूल, सिंदूर, अक्षत व मिष्ठान अर्पित किए. इसके बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा.
आचार्य रामाशंकर दुबे के अनुसार, वट सावित्री पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से 8 बजकर 24 मिनट तक है. वहीं अमावस्या तिथि सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी. उन्होंने बताया कि महिलाएं स्नान के बाद लाल या पीले वस्त्र धारण कर बरगद के पेड़ के नीचे जल अर्पित करें और पूजा के बाद ब्राह्मण को दान दें. इस दिन पंखा चढ़ाने का भी विशेष महत्व माना जाता है.
पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे. कहा जाता है कि सावित्री ने अपनी बुद्धिमता और अटूट समर्पण से यमराज को सत्यवान का जीवन लौटाने के लिए विवश कर दिया था. इसी घटना के बाद से वट वृक्ष की पूजा और वट सावित्री व्रत की परंपरा चली आ रही है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.


