बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के गठन के 16 दिन बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली थी। हालांकि सरकार गठन के बाद अब तक कैबिनेट विस्तार नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

 

बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा नेताओं की व्यस्तता के कारण मंत्रिमंडल विस्तार टल गया था। अब 4 मई को बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद बिहार में कैबिनेट विस्तार का रास्ता साफ माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार 4 से 10 मई के बीच कभी भी मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है।

 

जेडीयू विधायक दल के नेता और नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले श्रवण कुमार ने भी संकेत दिया है कि जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि किसे मंत्री बनाया जाएगा और किसे कौन सा विभाग मिलेगा, यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है।

 

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जेडीयू में श्रवण कुमार, लेसी सिंह, सुनील कुमार, अशोक चौधरी, मदन सहनी, जमा खान, शीला मंडल, जयंत राज और रत्नेश सदा जैसे नेताओं को फिर से मौका मिल सकता है। वहीं भाजपा की ओर से मंगल पांडेय, विजय कुमार सिन्हा, दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह, रामकृपाल यादव और नीतीश मिश्रा जैसे नाम चर्चा में हैं।

 

बिहार विधानसभा में 243 विधायक होने के कारण अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। फिलहाल कैबिनेट में केवल 3 मंत्री हैं, यानी अभी 33 और मंत्रियों की नियुक्ति संभव है। जेडीयू और भाजपा के बीच लगभग बराबर हिस्सेदारी रहने की संभावना है।

 

उधर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी पर तंज कसते हुए कहा कि भारी बहुमत के बावजूद सरकार अब तक पूरी तरह से मंत्रिमंडल का गठन नहीं कर सकी है।

 

अब सबकी नजर अगले सप्ताह होने वाले संभावित कैबिनेट विस्तार पर टिकी है, जहां नए और पुराने चेहरों के बीच संतुलन साधने की बड़ी चुनौती सरकार के सामने होगी।

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