राजधानी Patna में गंगा तट पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार तेज हो रहा है। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम के निर्देश पर रविवार को अभियान के आठवें दिन बड़ी कार्रवाई करते हुए सभ्यता द्वार से कलेक्ट्रेट के पीछे तक करीब 35 पक्के अवैध निर्माणों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि गंगा किनारे की असर्वेक्षित भूमि पूरी तरह सरकारी है और इस पर किसी भी निजी दावे को मान्यता नहीं दी जाएगी।
डीएम के अनुसार, गंगा तट पर्यावरणीय रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है, जहां किसी भी तरह का अवैध निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि जनहित के खिलाफ भी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस इलाके में चल रही विकास योजनाओं में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अतिक्रमण हटने के बाद दोबारा कब्जा न होने दिया जाए।
प्रशासन ने बताया कि यह कार्रवाई National tribunal (NGT) और uchch nyayalay के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के आदेश के अनुसार फ्लड प्लेन और गंगा के तटीय क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है। इसके बावजूद लगातार अवैध निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं।
अतिक्रमण हटाने के बाद इन क्षेत्रों में हरित क्षेत्र, पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विकास की योजना है। गंगा पथ और अशोक राजपथ जैसे इलाकों को और व्यवस्थित व सुंदर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
वहीं, राजापुर इलाके में भी कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। नगर निगम ने कई बहुमंजिला मकानों पर नोटिस चस्पा कर 30 दिनों में उन्हें हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही पांच दिनों के भीतर बिजली-पानी काटने की चेतावनी दी गई है।
हालांकि, मकान मालिक इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से टैक्स दे रहे हैं और जमीन निजी रूप से खरीदी गई थी। कई प्रभावित परिवारों ने अब अदालत का रुख कर लिया है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
