बिहार के पूर्णिया जिले का झील टोला गांव अपनी अनोखी पहचान के लिए जाना जाता है। यहां फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि लोगों के जीवन का हिस्सा है। लगभग 12–13 हजार की आबादी वाले इस गांव में हर घर में एक फुटबॉल खिलाड़ी मिल जाएगा। खास बात यह है कि यहां के बच्चे क्रिकेट या अन्य खेलों की बजाय सिर्फ फुटबॉल खेलना पसंद करते हैं।

गांव के बच्चों और युवाओं के लिए Lionel messi और cristiano Ronaldo प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत हैं। अधिकतर घरों में इन खिलाड़ियों की तस्वीरें लगी होती हैं, जिन्हें देखकर बच्चे रोज अभ्यास के लिए प्रेरित होते हैं। स्थानीय कोच राहुल तिर्की बताते हैं कि यहां के बच्चे पूरे समर्पण के साथ फुटबॉल खेलते हैं और अन्य खेलों में उनकी रुचि लगभग नहीं के बराबर है।

झील टोला का फुटबॉल मैदान पिछले 45–46 वर्षों से प्रतिभाओं को निखार रहा है। यहां से कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं। बीएन गांगुली, मो. शोएब, और पद्म सिन्हा जैसे खिलाड़ी इसी मैदान की देन हैं। कई खिलाड़ियों को खेल के आधार पर सरकारी नौकरी और निजी कंपनियों में अच्छे पद भी मिले हैं।

गांव के लोग महान फुटबॉलर Syed Abduls samad को अपना आदर्श मानते हैं, जिन्हें “फुटबॉल का जादूगर” कहा जाता था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया और युवाओं के लिए प्रेरणा बने।

हालांकि इतनी प्रतिभा होने के बावजूद गांव के लोग सरकारी उपेक्षा से निराश हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नेताओं द्वारा वादे तो किए जाते हैं, लेकिन मैदान के विकास या खिलाड़ियों की मदद के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। उनका मानना है कि यदि सरकार सहयोग करे, तो यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

झील टोला आज भी अपने दम पर फुटबॉल की विरासत को आगे बढ़ा रहा है, लेकिन उसे आगे बढ़ने के लिए सहारे की जरूरत है।

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