बिहार में नौकरी पर सियासत तेज: PK और पप्पू यादव के ऐलान से बढ़ी राजनीतिक हलचल

बिहार की राजनीति में युवाओं और रोजगार का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। राज्य में युवा आबादी बड़ी संख्या में है और नौकरी-रोजगार लंबे समय से चुनावी राजनीति का अहम मुद्दा रहा है। 2014 में नरेंद्र मोदी को युवाओं का समर्थन मिला, जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के 10 लाख नौकरी के वादे ने राजद को सबसे बड़ी पार्टी बनने में मदद की थी।

 

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NDA का दावा: 2025 विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य रखा था। एनडीए सरकार बनने के बाद सरकार की ओर से दावा किया गया है कि अब तक बड़ी संख्या में युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है और 2030 तक लक्ष्य पूरा करने की दिशा में काम जारी है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं।

 

PK के ऐलान से बढ़ी हलचल: बांकीपुर उपचुनाव के बाद रोजगार को लेकर राजनीतिक घोषणाएं तेज हो गई हैं। नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर ने 10 हजार युवाओं को नौकरी देने की घोषणा करते हुए आवेदन मांगे हैं। उनके इस ऐलान ने बिहार की सियासत में रोजगार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

 

पप्पू यादव का बड़ा दावा: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी 30 अगस्त को पूर्णिया में 40 से अधिक कंपनियों को बुलाकर 10 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की घोषणा की है। दोनों नेताओं की घोषणाओं से अन्य सांसदों और विधायकों पर भी अपने क्षेत्रों में रोजगार के लिए पहल करने का दबाव बढ़ सकता है।

 

विशेषज्ञ की राय: पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य नवल किशोर चौधरी के मुताबिक, युवाओं को किसी भी माध्यम से नौकरी या रोजगार मिलता है तो यह सकारात्मक पहल है। उनका कहना है कि बिहार से बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए पलायन करते हैं, इसलिए जो नेता रोजगार के वादे पर काम करेगा, उसे युवाओं का समर्थन मिल सकता है।

 

वहीं, मंत्री श्रवण कुमार ने प्रशांत किशोर पर पलटवार करते हुए उनके रोजगार संबंधी दावों पर सवाल उठाए। भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने भी घोषणा को अच्छी बात बताया, लेकिन प्रशांत किशोर के पुराने वादों पर सवाल खड़े किए।

 

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आधुनिक तकनीक से दुनिया से जुड़े बिहार के युवा अब ज्यादा जागरूक हैं और उनकी अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। ऐसे में आगामी राजनीति में युवाओं और रोजगार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।

 

 

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